कोलकाताः मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रुख के साथ हुई। वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव में प्रमुख सूचकांकों में शुरुआती कारोबार के दौरान तेज गिरावट दर्ज की गई।
सुबह करीब 9:16 बजे बीएसई सेंसेक्स 735.65 अंक यानी 0.99 प्रतिशत गिरकर 73,371.20 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी 226.95 अंक यानी लगभग 0.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,741.30 पर खुला।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर
बाजार में गिरावट की बड़ी वजह ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी रही। सुबह 9:20 बजे के आसपास ब्रेंट क्रूड 111.43 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो 1.51 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है।
तेल की कीमतों में यह उछाल ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है।
ट्रंप के बयान से बढ़ी बेचैनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दी गई चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता पैदा कर दी है। इस क्षेत्र से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई होती है, ऐसे में किसी भी तनाव का सीधा असर कीमतों पर पड़ता है।
तेल महंगा होने से भारत जैसे आयात-निर्भर देश की लागत बढ़ने और महंगाई पर दबाव आने की आशंका बढ़ जाती है, जिससे निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान कमजोर पड़ता है।
बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बना रही है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता के कारण निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।
तकनीकी स्तरों पर बाजार की नजर
कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च प्रमुख श्रीकांत चौहान के मुताबिक, बाजार तकनीकी रूप से अभी महत्वपूर्ण स्तरों के आसपास बना हुआ है।
निफ्टी के लिए 22,500 और सेंसेक्स के लिए 72,700 अहम सपोर्ट स्तर हैं। अगर ये स्तर टूटते हैं तो बाजार की तेजी कमजोर पड़ सकती है। वहीं 23,200-23,300 (निफ्टी) और 74,500-75,000 (सेंसेक्स) मजबूत रेजिस्टेंस के रूप में देखे जा रहे हैं।
उन्होंने सलाह दी कि इंट्राडे ट्रेडर्स को गिरावट पर खरीदारी और उछाल पर मुनाफावसूली की रणनीति अपनानी चाहिए, लेकिन कमजोर पोजिशन को सीमित रखना बेहतर होगा।
वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेत
हालांकि अमेरिकी बाजारों में मजबूती देखने को मिली। एसएंडपी 500 और नैस्डैक लगातार चौथे सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि डाउ जोंस भी हरे निशान में रहा। इसके बावजूद एशियाई और भारतीय बाजारों पर तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव का दबाव साफ दिखा। कुल मिलाकर, बाजार की दिशा अब काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करती नजर आ रही है।
(समाचार एई समय कहीं भी निवेश करने की सलाह नहीं देता है। शेयर बाजार या किसी भी निवेश में जोखिम होता है। निवेश से पहले पूरी जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। यह खबर केवल शिक्षा और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।)