नई दिल्ली : भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) एक अनोखी योजना पर विचार कर रहा है। इस योजना के तहत प्राकृतिक संसाधनों, खासकर जहरीले और खतरनाक सरीसृपों- सांप और मगरमच्छ को ‘नेचुरल डिटरेंट’ यानी प्राकृतिक बाधा के रूप में इस्तेमाल करने की संभावना तलाश की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक यह योजना खासतौर पर उन सीमावर्ती इलाकों के लिए है, जहां बाड़ लगाना संभव नहीं है। भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा है जिसमें लगभग 175 किलोमीटर हिस्सा नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों का है। इन इलाकों में कंटीले तार लगाना बेहद कठिन है जिससे ये क्षेत्र घुसपैठ और तस्करी के लिहाज से सबसे संवेदनशील बन जाते हैं।
बताया जा रहा है कि BSF ऐसे नदी और दलदली इलाकों की पहचान कर रहा है जहां इस तरह की व्यवस्था प्रभावी हो सकती है। योजना के अनुसार, इन जगहों पर सांप और मगरमच्छों की मौजूदगी बढ़ाकर इलाके को खतरनाक बनाया जा सकता है ताकि घुसपैठिए इन रास्तों का इस्तेमाल करने से डरें।
हालांकि यह योजना अभी शुरुआती चरण में है और इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। BSF के सामने यह भी चुनौती है कि इस तरह की व्यवस्था को व्यावहारिक रूप से कैसे लागू किया जाए।
इसी के साथ BSF आधुनिक तकनीकों का भी सहारा ले रहा है। ड्रोन, सेंसर और कैमरों के जरिए निगरानी को पहले से अधिक मजबूत किया जा रहा है।
गौरतलब है कि सीमा क्षेत्रों में तस्करी और अवैध घुसपैठ की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। हाल ही में नदिया जिला में BSF ने करीब एक करोड़ रुपये के सोने के बिस्कुट बरामद किए थे और एक तस्कर को गिरफ्तार किया था। वहीं 2025 में एक अन्य घटना में तस्करी रोकने के दौरान गोलीबारी में एक बांग्लादेशी नागरिक की मौत भी हुई थी।
कुल मिलाकर सीमा सुरक्षा के लिए इस नए और असामान्य तरीके पर विचार जरूर शुरू हुआ है लेकिन इसकी व्यवहारिकता और प्रभाव को लेकर अभी कई सवाल बाकी हैं।