नई दिल्ली : वैश्विक तापमान में लगातार हो रही वृद्धि अब भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। एक हालिया अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि आने वाले समय में देश में पर्याप्त और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण एवं विकास संस्थान (आईआईईडी) की नई रिपोर्ट के अनुसार बढ़ते तापमान का सीधा असर खाद्य उत्पादन पर पड़ रहा है। भारत जैसे कृषि आधारित देश के लिए यह स्थिति अधिक चिंताजनक है क्योंकि यहां 140 करोड़ की आबादी कृषि और मैसम पर निर्भर है।
रिपोर्ट में एक नया ‘फूड सिक्योरिटी इंडेक्स’ तैयार किया गया है। इसमें भारत का बेसलाइन स्कोर 5.31 दर्ज किया गया है जो वैश्विक औसत 6.74 से काफी कम है। भारत इस मामले में ब्राजील (6.72), मेक्सिको (6.36) और इंडोनेशिया (5.87) से भी पीछे है।
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि तापमान बढ़ने से हालात और खराब हो सकते हैं। अगर औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ता है तो भारत का स्कोर घटकर 4.96 तक आ सकता है। वहीं 2 डिग्री वृद्धि की स्थिति में यह और गिरकर 4.52 हो सकता है।
अध्ययन में बताया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम चरम होता जा रहा है। इसका सबसे पहला असर भोजन की गुणवत्ता और उपलब्धता पर पड़ता है। पहले पौष्टिक भोजन की कमी होती है फिर पर्याप्त भोजन जुटाना भी मुश्किल हो जाता है।
इस शोध में 162 देशों का विश्लेषण चार आधारों पर किया गया। इसमें भोजन की उपलब्धता, उसकी कीमत, पोषण स्तर और सप्लाई सिस्टम की मजबूती को शामिल किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की करीब 59 प्रतिशत आबादी ऐसे देशों में रहती है जहां खाद्य सुरक्षा का स्तर औसत से नीचे है। तापमान 1.5 डिग्री बढ़ने पर करीब 250 करोड़ लोग और इस श्रेणी में आ सकते हैं।
आईआईईडी की विशेषज्ञ रितु भारद्वाज ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के लिए कम जिम्मेदार गरीब देश ही सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।