काठमांडूः पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के बाद नेपाल सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। नेपाल ने सप्ताह में दो दिन -शनिवार और रविवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का निर्णय लिया है। यह फैसला काठमांडू स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया।
6 अप्रैल से लागू होगा नया नियम
सरकारी प्रवक्ता सस्मित पोखरेल के अनुसार यह नई व्यवस्था 6 अप्रैल से लागू होगी। इसके तहत सरकारी कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में रविवार को भी छुट्टी रहेगी, जिससे पेट्रोलियम की खपत कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि सरकारी दफ्तर अब सप्ताह के बाकी दिनों में सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक काम करेंगे।
ईंधन आपूर्ति पर संकट और वैकल्पिक उपाय
सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण पेट्रोलियम की आपूर्ति अनिश्चित हो गई है। इसी को देखते हुए कैबिनेट ने पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने का भी फैसला लिया है। इस कदम को भविष्य में ईंधन की कमी से निपटने और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
वैश्विक संकट का असर नेपाल पर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में बाधा और पश्चिम एशिया में ईरान, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। इसका सीधा असर नेपाल जैसे देशों पर पड़ा है, जहां ईंधन की उपलब्धता और कीमतें दोनों प्रभावित हुई हैं।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं कीमतें
नेपाल में पेट्रोल की कीमत काठमांडू घाटी में 202 नेपाली रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं डीजल और केरोसीन की कीमत 182 रुपये प्रति लीटर हो गई है।
पिछले 18 दिनों में पेट्रोल की कीमत में 45 रुपये प्रति लीटर और डीजल-केरोसीन में 40 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले जून 2022 में पेट्रोल 199 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचा था, लेकिन अब नया रिकॉर्ड बन गया है।
हवाई ईंधन भी महंगा
घरेलू उड़ानों के लिए एविएशन ईंधन की कीमत 127 रुपये से बढ़कर 251 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए काठमांडू में इसकी कीमत 819 डॉलर प्रति किलोलीटर तक पहुंच गई है।
बढ़ते घाटे से जूझ रही तेल कंपनी
सरकारी कंपनी नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को भी भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल पर प्रति लीटर 34.36 रुपये, डीजल पर 120.54 रुपये और एलपीजी सिलेंडर पर 416.37 रुपये का घाटा हो रहा है। कुल मिलाकर हर दो हफ्ते में कंपनी को लगभग 11.71 अरब रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान के अनुसार कीमतें आगे और बढ़ सकती हैं।