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रूस के शीर्ष थिंक टैंक के नए प्रमुख का भारत-चीन के बीच संतुलन पर जोर, अमेरिका की भूमिका पर जताई चिंता

दिमित्री ट्रेनिन बोले ने कहा-"रूस नहीं चाहता किसी भी देश का इस्तेमाल रणनीतिक टकराव में हो"

By डॉ. अभिज्ञात

Apr 04, 2026 17:58 IST

मॉस्को: रूस के प्रमुख थिंक टैंक रूसी अंतरराष्ट्रीय मामलों की परिषद के नए अध्यक्ष दिमित्री ट्रेनिन ने भारत और चीन के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने पर जोर दिया है। हाल ही में एक अप्रैल को इस प्रतिष्ठित संस्था की कमान संभालने वाले ट्रेनिन ने अपने पहले मीडिया इंटरव्यू में कहा कि रूस को अपने दोनों एशियाई साझेदारों भारत और चीन के बीच सकारात्मक संतुलन बनाए रखना चाहिए। उनका मानना है कि किसी भी बाहरी ताकत, खासकर अमेरिका को इस संतुलन का फायदा उठाकर एक देश को दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल करने का मौका नहीं मिलना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि चीन, जो रूस का सबसे बड़ा पड़ोसी है, उस पर विशेष ध्यान देना जरूरी है और इस दिशा में व्यवस्थित नीति अपनाई जानी चाहिए। साथ ही भारत को लेकर उन्होंने सकारात्मक दृष्टिकोण जताया, हालांकि यह भी माना कि रूस की समझ अभी पूरी तरह गहराई तक नहीं पहुंची है।

करीब 70 वर्षीय ट्रेनिन सोवियत-रूसी सेना में कर्नल रह चुके हैं और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। वे अमेरिका और रूस के बीच परमाणु तथा अंतरिक्ष हथियारों से जुड़े वार्ताओं में भी जुड़े रहे हैं। उनके सैन्य करियर में देश और विदेश दोनों जगह महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल रही हैं, जिनमें रोम स्थित नाटो डिफेंस कॉलेज में वरिष्ठ शोध फेलो के रूप में कार्य भी शामिल है, जहां वे गैर-नाटो पृष्ठभूमि से आने वाले पहले विशेषज्ञ थे।

ट्रेनिन ने अपने विज़न को स्पष्ट करते हुए कहा कि रूस एक स्वतंत्र निर्णय लेने वाला देश है, जो किसी के दबाव में नहीं आता और वैश्विक संतुलन बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस परिषद को नई दिशा और ऊर्जा देने का प्रयास करेंगे, ताकि मौजूदा और भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

उन्होंने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को अस्थिर और नाटकीय बताया और कहा कि दुनिया एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। उनके अनुसार यह स्थिति किसी हद तक विश्व युद्ध जैसे बड़े ऐतिहासिक परिवर्तनों की याद दिलाती है, हालांकि वे “तीसरे विश्व युद्ध” शब्द का इस्तेमाल उचित नहीं मानते। उनकी नजर में इसे एक “नए प्रकार का वैश्विक संघर्ष” कहना ज्यादा सही होगा। ट्रेनिन 1994 में कार्नेगी मॉस्को सेंटर से जुड़े थे, लेकिन 2022 में यूक्रेन अभियान के समर्थन के कारण उन्हें वहां से हटाया गया था। गौरतलब है कि रूसी अंतरराष्ट्रीय मामलों की परिषद की स्थापना लगभग 15 वर्ष पहले पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के आदेश से हुई थी। यह संस्था भारत की इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स के समान मानी जाती है।

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