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दशकों की कानूनी लड़ाई के बाद मिला तलाक, 61 मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

अदालत ने अपने फैसले में पति को निर्देश दिया कि वह दो महीने के भीतर पत्नी को 20 लाख रुपये बतौर गुजारा भत्ता अदा करे।

By राखी मल्लिक

Apr 04, 2026 18:01 IST

नई दिल्ली : देश में विवाह विवादों के मामलों में अक्सर लंबा इंतजार देखने को मिलता है, जहां कानूनी जटिलताओं के कारण फैसले वर्षों तक लंबित रहते हैं। ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया, जिसमें एक दंपति को तलाक के लिए कई दशकों तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़े।

बताया जा रहा है कि इस मामले में कुल 61 कानूनी विवाद जुड़े हुए थे। लंबी सुनवाई, भरण-पोषण और संपत्ति के बंटवारे जैसे मुद्दों के कारण यह केस वर्षों तक उलझा रहा। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने इस लंबे विवाद का निपटारा कर दिया।

शीर्ष अदालत की एक खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्न और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां शामिल थे, ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए इस मामले में अंतिम फैसला सुनाया। अदालत ने पति की ओर से दायर तलाक की याचिका को स्वीकार कर लिया।

यह दंपति 1994 में विवाह बंधन में बंधा था, लेकिन शुरू से ही दोनों के बीच संबंध सामान्य नहीं रहे। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने पारिवारिक अदालत में तलाक की अर्जी दी और लंबे समय तक अलग-अलग रह रहे थे। यहां तक कि एक दुर्घटना के बाद भी पत्नी ने पति से संपर्क नहीं किया, जिससे रिश्ते में दूरी और स्पष्ट हो गई।

इस मामले में समय के साथ कई अन्य विवाद भी जुड़ते गए, जिनमें घरेलू हिंसा और आपराधिक मामले भी शामिल थे। भरण-पोषण और संपत्ति के मुद्दों पर असहमति के कारण मामला और जटिल हो गया।

अदालत ने अपने फैसले में पति को निर्देश दिया कि वह दो महीने के भीतर पत्नी को 20 लाख रुपये बतौर गुजारा भत्ता अदा करे। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि तलाक के बाद दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज नहीं करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश के साथ जुड़े सभी मामलों का भी निपटारा कर दिया।

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