नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी केवल चुनाव आयोग के समर्थन के बिना चुनाव नहीं जीत सकती। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल और बिहार में एक ही व्यक्ति के नाम दो जगहों पर वोटर लिस्ट में दर्ज हैं। सिब्बल ने पांच ऐसे उदाहरण पेश किए और कहा कि ऐसे हजारों मामले हो सकते हैं।
सिब्बल ने कहा, “भाजपा अकेले चुनाव नहीं जीत सकती। इन्हें बाहरी लोगों की मदद चाहिए। इसी कारण गृह मंत्री अमित शाह 15 दिन बंगाल में रहने की बात कर रहे हैं।”
पुराने चुनावों के उदाहरण और रेल मंत्रालय पर सवाल
सिब्बल ने पिछले साल बिहार चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि छठ पूजा के बाद भी हरियाणा के करनाल सहित अन्य इलाकों से चार ट्रेनें बिहार भेजी गईं। उन्होंने वीडियो दिखाकर आरोप लगाया कि इन ट्रेनों से लोग वोट डालने भेजे जा रहे थे। रेल मंत्रालय ने पहले छठ पूजा का हवाला दिया, लेकिन वीडियो जारी होने के बाद कोई जवाब नहीं आया।
सिब्बल ने स्पष्ट किया कि चुनाव में भाजपा तब ही आत्मनिर्भर होती है जब चुनाव आयोग उसका साथ देता है।
पश्चिम बंगाल में फॉर्म-6 और वोटर लिस्ट विवाद
सिब्बल ने पश्चिम बंगाल में हो रहे फॉर्म-6 आवेदनों पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पांच मतदाता बिहार और बंगाल दोनों जगह वोटर लिस्ट में दर्ज हैं। उन्होंने इन पांच मतदाताओं के नाम, EPIC नंबर और दोनों राज्यों में रजिस्ट्रेशन के सबूत पेश किए।
सिब्बल ने कहा, “ये केवल पकड़े गए मामले हैं, लेकिन ऐसे हजारों हो सकते हैं।” उन्होंने इसे तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पत्र से जोड़ा, जिसमें उन्होंने गैर-निवासी लोगों को बंगाल की वोटर लिस्ट में जोड़ने की कोशिश को अवैध और लोकतंत्र विरोधी बताया था।
चुनाव कार्यक्रम और मतदाता आंकड़े
चुनाव आयोग ने हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का कार्यक्रम घोषित किया है। कुल 294 सीटों पर दो चरणों में मतदान होगा – पहला चरण 23 अप्रैल 2026 (152 सीटें) और दूसरा चरण 29 अप्रैल 2026 (142 सीटें)। मतगणना 4 मई को होगी और पूरा चुनावी कार्यक्रम 6 मई तक पूरा होगा।
राज्य में कुल मतदाता 7.04 करोड़ हैं, जिनमें लगभग 3.6 करोड़ पुरुष, 3.44 करोड़ महिलाएं और तीसरे जेंडर के 1,382 मतदाता शामिल हैं।
विपक्ष का आरोप: लोकतंत्र पर खतरा
सिब्बल ने कहा कि भाजपा बिना चुनाव आयोग के समर्थन के चुनाव नहीं जीत सकती। विपक्ष का आरोप है कि वोटर लिस्ट में बदलाव, जिसमें स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) भी शामिल है, लोकतंत्र की जड़ों को प्रभावित कर रहा है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है।