इस्लामाबादः जरा सोचिए, आप सुबह अपनी बाइक की टंकी फुल कराने पेट्रोल पंप जाते हैं और बिल आता है ₹458 प्रति लीटर! सुनने में यह किसी डरावने सपने जैसा लगता है, लेकिन सरहद पार पाकिस्तान में आज यही हकीकत है। 3 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान सरकार ने ईंधन की कीमतों में ऐसा 'बम' फोड़ा है कि आम आदमी के पास अब रोने के अलावा कोई चारा नहीं बचा।
सबसे बड़ा झटका : पेट्रोल और डीजल की नई दरें
पाकिस्तान के ऑयल एंड गैस रेगुलेटरी अथॉरिटी (OGRA) ने जो नई कीमतें जारी की हैं, वे होश उड़ा देने वाली हैं:
पेट्रोल : ₹321 से सीधा ₹458.41 प्रति लीटर (₹138 की भारी बढ़ोतरी)
डीजल : अब ₹520.35 प्रति लीटर के पार!
सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा है। लोग कह रहे हैं कि अब तो सांस लेने पर भी टैक्स लगना बाकी है।
आखिर क्यों लगी पाकिस्तान में 'महंगाई की आग' ?
पाकिस्तान इस वक्त चौतरफा संकट से घिरा है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
वैश्विक तनाव : ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को आग लगा दी है। दुबई क्रूड $128.52 प्रति बैरल तक पहुंच गया है।
रुपए की बदहाली : डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपया लगातार गिर रहा है, जिससे तेल का आयात करना बेहद महंगा हो गया है।
IMF की शर्तें : कर्ज के बोझ तले दबे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कड़ी शर्तों को मानना पड़ रहा है, जिसके कारण सरकार चाहकर भी सब्सिडी नहीं दे पा रही।
आम आदमी पर क्या होगा असर ?
यह सिर्फ पेट्रोल की कीमत नहीं है, यह एक 'महंगाई का चक्रवात' है जो हर चीज को निगल जाएगा:
किराया आसमान पर: बस, रिक्शा और ट्रक का भाड़ा बढ़ने से दफ्तर जाने वाले और छात्रों की जेब खाली हो जाएगी।
थाली से गायब होगी रोटी : जब ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा, तो आटा, दाल, दूध और सब्जियों की कीमतें भी दोगुनी हो जाएंगी।
धंधा चौपट : डिलीवरी बॉय, टैक्सी ड्राइवर और छोटे व्यापारियों के लिए अब अपना काम जारी रखना नामुमकिन सा हो गया है।
भारत vs पाकिस्तान : एक बड़ी तुलना
जहां भारत में आज पेट्रोल औसतन ₹100-₹110 के बीच स्थिर है, वहीं पाकिस्तान में यह 4 गुना ज्यादा महंगा हो चुका है। भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदने की रणनीति और मजबूत पेट्रोलियम रिजर्व के दम पर अपनी जनता को इस वैश्विक संकट से बचा लिया। दूसरी ओर, पाकिस्तान की राजनीतिक अस्थिरता और कर्ज पर निर्भरता ने उसे इस मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।
आगे क्या ?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल-ईस्ट में युद्ध के हालात नहीं सुधरे, तो अगली समीक्षा में पेट्रोल ₹500 का आंकड़ा भी पार कर सकता है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का कहना है कि लागत तो ₹544 होनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने 'थोड़ी राहत' दी है। मगर जनता पूछ रही है कि ऐसी राहत का क्या करें जिससे चूल्हा जलाना ही मुश्किल हो जाए ?
महंगाई दर में इजाफा
देश में महंगाई लगातार बढ़ रही है। जनवरी में महंगाई दर 5.8% थी। अब बढ़कर 7.3% हो गई है। तेल और गैस महंगे होने से आयात (इम्पोर्ट) महंगा हो गया है, जिससे पाकिस्तानी रुपये पर दबाव बढ़ा है। इसका असर बिजली और ट्रांसपोर्ट के खर्च पर भी पड़ा है।
गैस और बिजली का संकट
ईंधन की कमी के कारण गैस और बिजली भी महंगी हो गई है। एलपीजी सिलेंडर की कीमत 2665 रुपये से बढ़कर 3500 रुपये हो गई है। बिजली के बिल में 1.62 रुपये प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी की गई है। पहले से ही पाकिस्तान में बिजली महंगी थी, अब यह और ज्यादा महंगी हो गई है। इससे लोगों के लिए खाना बनाना और घर चलाना मुश्किल हो गया है।
खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़े
महंगाई का असर खाने-पीने की चीजों पर भी साफ दिख रहा है। आटे की कीमत में 35% तक बढ़ोतरी।
20 किलो आटा लगभग 2000 रुपये
दाल 250 से 450 रुपये किलो
दूध और डेयरी उत्पादों में 2–9% बढ़ोतरी
टमाटर 250 रुपये किलो, आलू 50 रुपये किलो, प्याज 80 रुपये किलो
इन बढ़ती कीमतों ने खासकर मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है।