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शब्द नहीं शक्ति है अरिदमन...स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी पर रक्षा मंत्री के धमाकेदार ट्वीट से कांपे चीन-पाकिस्तान! तारागिरी भी देगा टेंशन

INS तारागिरी के नौसेना में शामिल होने से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी अरिदमन के बारे में पोस्ट कर चीन-पाकिस्तान को टेंशन में डाल दिया है। शुक्रवार को ही

By लखन भारती

Apr 03, 2026 16:32 IST

नई दिल्ली: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार सुबह एक पोस्ट किया-शब्द नहीं शक्ति है अरिदमन। भारतीय नौसेना के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में INS अरिदमन भारत की तीसरी स्वदेशी रूप से निर्मित परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) जल्द ही कमीशन होने वाली है। हालांकि, राजनाथ सिंह के इस ट्वीट से चीन और पाकिस्तान की टेंशन बढ़ा दी है। पहले ही ये देश आईएनएस तारागिरी को लेकर टेंशन में होंगे, जिसे आज भारतीय नौसेना में शामिल किया जा रहा है।

शुक्रवार को विशाखापत्तनम में स्वदेश निर्मित उन्नत युद्धपोत तारागिरी की कमिशनिंग के दौरान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ये शहर अपने आप में भारत की समुद्री शक्ति का साक्षी रहा है इसलिए विशाखापट्टनम से INS तारागिरी कमीशनिंग अपने आप में एक बहुत ही महत्वपूर्ण मूवमेंट है। हमारी सांस्कृतिक विरासत से लेकर आज की रणनीतिक वास्तविकताएं तक समुद्र में हमेशा भारत की दिशा तय की है। भारत का हमेशा से ही समुद्र के साथ अनोखा संबंध रहा है और समय के साथ समुद्र से हमारा रिश्ता और भी मजबूत होता गया है।

'ताकतवर नौसेना कोई विकल्प नहीं आवश्यकता'

राजनाथ सिंह ने आगे कहा, एक मजबूत और सक्षम नौसेना कोई विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है क्योंकि हमारी ऊर्जा सुरक्षा समुद्र पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा परिकल्पित 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में समुद्री शक्ति बहुत महत्वपूर्ण है।

INS तारागिरी की खासियस

प्रोजेक्ट 17ए’ के तहत चौथे प्लेटफॉर्म के रूप में तारागिरी 6,670 टन का युद्धपोत है, जिसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई द्वारा बनाया गया है, जो उन्नत डिजाइन और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता को प्रदर्शित करता है।

इस युद्धपोत की बनावट अधिक पतली है, जिससे इसका रडार पर दिखाई देने वाला आकार बहुत कम हो जाता है और यह जटिल समुद्री परिस्थितियों में अधिक सुरक्षित रहने में सक्षम है।

यह पोत 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित है और भारत के घरेलू रक्षा तंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है, जिसमें 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) शामिल हैं और हजारों लोगों को रोजगार मिलता है।

तारागिरी में संयुक्त डीजल या गैस प्रणोदन प्रणाली लगी है, जो इसे उच्च गति और लंबी दूरी तक संचालन की क्षमता प्रदान करती है।

INS अरिदमन की क्या हैं खूबियां

INS अरिदमन अरिहंत-श्रेणी की तीसरी SSBN पनडुब्बी है, जिसे भारत के उन्नत प्रौद्योगिकी वेसेल (ATV) प्रोजेक्ट के तहत विकसित किया गया है।

यह पनडुब्बी समुद्र से परमाणु हमले की क्षमता प्रदान करती है, जो भारत की ‘पहले इस्तेमाल नहीं’ (No-First-Use) नीति के तहत प्रहार क्षमता को मजबूत बनाती है।

यह 90% से अधिक स्वदेशी तकनीक से निर्मित है, जिसमें इसका परमाणु रिएक्टर भी शामिल है। इसे विशाखापट्टनम स्थित शिप बिल्डिंग सेंटर ने विकसित किया है।

अरिदमन के आने से क्या बदलेगा

परमाणु त्रिआयामी क्षमता मजबूत होगी: INS अरिदमन की तैनाती से भारत की अंडरवाटर सेकंड-स्ट्राइक क्षमता बेहद मजबूत होगी, जो किसी भी परमाणु प्रतिरोधक नीति के लिए आधारशिला होती है।

लगातार समुद्री निगरानी हो सकेगी: अरिहंत और अरिघात के साथ तीसरी SSBN जुड़ने से भारत अब निरंतर समुद्र में रणनीतिक निगरानी बनाए रख सकेगा।

क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण: हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच यह पनडुब्बी भारत की रणनीतिक क्षमता और सुरक्षा दायरे को और बढ़ाती है।

आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि: लगभग पूर्ण स्वदेशी निर्माण भारत की जटिल परमाणु पनडुब्बी तकनीक पर पकड़ को दर्शाता है और रक्षा क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है।

नौसेना का आधुनिकीकरण: यह पनडुब्बी नौसेना के आधुनिक बेड़े में महत्वपूर्ण जोड़ है और भारत की समुद्री शक्ति को वैश्विक स्तर पर बढ़ाती है।

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