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भारत का डीजल निर्यात सात साल के उच्चतम स्तर पर, मार्च में बनाया नया रिकार्ड

भारत ने डीजल निर्यात पर कुछ सीमा शुल्क भी लगाया है इसके बावजूद दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में निर्यात की यह प्रवृत्ति आने वाले महीनों में बनी रहने की संभावना है।

By राखी मल्लिक

Apr 03, 2026 15:38 IST

नई दिल्ली : भारत ने मार्च महीने में अपने डीजल निर्यात को सात वर्षों के उच्चतम स्तर तक पहुंचा दिया है, जबकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ईंधन आपूर्ति बाधित होने का असर पूरी दुनिया के बाजार पर पड़ा और इस मौके का लाभ उठाते हुए भारतीय रिफाइनरियों ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में अपनी डीजल आपूर्ति बढ़ाई।

जहाज संचालन के आंकड़ों के अनुसार इरान और अमेरिका इजराइल संघर्ष के कारण एशियाई बाजार में ईंधन की कमी पैदा होने पर भारत ने अतिरिक्त रिफाइनिंग क्षमता का इस्तेमाल कर यह मांग पूरा की। पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान आने पर भारतीय कंपनियों ने रूस से भारी मात्रा में तेल आयात किया और उसे परिष्कृत कर दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजार में भेजा।

केपलर के जहाज संचालन आंकड़ों के अनुसार मार्च में लगभग 10 लाख मीट्रिक टन यानी 74.5 लाख बैरल डीजल इस मार्ग से निर्यात हुआ, जिसमें करीब आधा हिस्सा सिंगापुर भेजा गया। इस निर्यात का लगभग 90% हिस्सा रिलायंस इंडस्ट्रीज ने संभाला। हालांकि कंपनी ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी है।

इरान और अमेरिका इजराइल संघर्ष के कारण एशियाई रिफाइनरियों को उत्पादन घटाने के लिए मजबूर होना पड़ा, वहीं चीन और कुछ अन्य देशों ने परिष्कृत तेल निर्यात पर नियंत्रण शुरू किया। इसके परिणामस्वरूप दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत की तलाश में भारत की ओर मुड़े।

विशेषज्ञों का मानना है कि जो देश पहले चीन या उत्तर-पूर्व एशिया पर ईंधन के लिए निर्भर थे, वे अब भारत जैसे आपूर्तिकर्ताओं पर भरोसा कर रहे हैं। इस अवसर का फायदा उठाते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपने व्यापार को तेजी से बढ़ाया है।

भारत को वैश्विक तेल बाजार में ‘सुइंग सप्लायर’ माना जाता है क्योंकि स्थिति के अनुसार यह यूरोप या एशिया जिस बाजार में अधिक लाभ हो वहां अपने उत्पाद भेज सकता है। इसी लचीलापन के कारण वर्तमान परिस्थितियों में भारत निर्यात बढ़ाने में सक्षम रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अतिरिक्त आपूर्ति अप्रैल में बाजार पर दबाव को कम करने में मदद करेगी।

हालांकि भारत ने डीजल निर्यात पर कुछ सीमा शुल्क भी लगाया है इसके बावजूद दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में निर्यात की यह प्रवृत्ति आने वाले महीनों में बनी रहने की संभावना है। स्पार्टा कमोडिटीज के विश्लेषक जेम्स नोएल बेसविक का कहना है कि यह प्रवृत्ति इस वर्ष अगस्त तक जारी रह सकती है। अमेरिका द्वारा रूस और ईरान से तेल खरीद पर लगी अस्थायी रोक हटाने के बाद भारतीय रिफाइनरियां पूरी क्षमता से उत्पादन कर रही हैं।

मार्च के अंतिम सप्ताह में सिंगापुर और यूरोप के बाजार में डीजल की कीमतों का अंतर लगभग 20 डॉलर प्रति टन था, जिससे पूर्वी बाजार में निर्यात अधिक लाभकारी बन गया और रिफाइनरियों के लिए यह और आकर्षक विकल्प साबित हुआ।

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