नई दिल्ली : मार्च महीनें में भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात लगभग 90% बढ़ा दिया है। इसी दौरान देश का कुल तेल आयात करीब 15% घट गया। इस वृद्धि और गिरावट के बीच मुख्य कारण पश्चिम एशिया से तेल आपूर्ति में बड़े व्यवधान को बताया जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता का असर सीधे तौर पर भारत के तेल आयात पर पड़ा। जिससे LPG की आपूर्ति लगभग 40% कम हो गई और LNG आपूर्ति में भी गिरावट दर्ज की गई। इन हालातों ने भारत को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाशने के लिए मजबूर कर दिया।
रूस से आयात दिसंबर 2025 और जनवरी-फरवरी 2026 में थोड़ी कम रही थी, लेकिन अमेरिकी प्रशासन द्वारा 30 दिनों की छूट देने के बाद मार्च में रूस से तेल आयात फिर बढ़ गया। इस छूट ने समुद्री मार्ग से सीमित और प्रतिबंधित तेल खरीदने का अवसर उपलब्ध कराया। इसके अलावा अफ्रीका के कुछ देशों—एंगोला, गैबॉन, घाना और कांगो से भी तेल आयात में वृद्धि हुई है, हालांकि कुल आयात में इनका योगदान अभी भी सीमित है।
ग्लोबल एनालिटिक्स कंपनी केपलर के विशेषज्ञ सुमित रितोजा का कहना है कि पश्चिम एशियाई उत्पादक पाइपलाइन के जरिए कुछ आपूर्ति मार्ग बदल रहे हैं। इसकी वजह से समुद्री मार्ग में परेशानियों के बावजूद भारत अपनी आवश्यक तेल आपूर्ति जारी रख पा रहा है।
रितोजा ने बताया कि अप्रैल में रूस से तेल आयात जारी रह सकता है और ईरान व वेनेजुएला से भी तेल आने की संभावना है। जिससे आपूर्ति जोखिम में कुछ कमी आ सकती है।
वहीं कतर से LNG आपूर्ति मार्च में 92% घट गई, जिसे आंशिक रूप से अमेरिका, ओमान, एंगोला और नाइजीरिया से अतिरिक्त आयात के जरिए पूरा किया गया।