नई दिल्ली : चिप की कमी और कच्चे माल की दिक्कतों से जूझ रहे ऑटो उद्योग के लिए 2025-26 का वित्तीय वर्ष नई राहत और ऊर्जा लेकर आया है।
ऑटो निर्माताओं के संगठन, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष में कुल 47 लाख यात्री वाहनों की बिक्री हुई, जो भारतीय ऑटो उद्योग के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड है।
इस सफलता के पीछे मारुति सुजुकी इंडिया, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी अग्रणी कंपनियों का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा। सितंबर में वाहनों पर GST दर में कटौती और वर्ष के दूसरे हिस्से में त्योहारों के सीजन में बढ़ी मांग ने बिक्री को मजबूती करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2025-26 के वित्तीय वर्ष में ऑटो उद्योग ने दो चरणों का अनुभव किया। पहले छमाही में बिक्री में कुछ मंदी देखी गई, जबकि दूसरे छमाही में बाजार ने जोरदार वापसी की। GST दर में कमी, आयकर में राहत और रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती ने खरीदारों की खरीद क्षमता बढ़ाई।
हालांकि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने निर्माताओं के लिए चुनौतियां बढ़ा दी हैं। जिससे भविष्य में वाहन मूल्य बढ़ने की संभावना बनी हुई है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ने की आशंका से उद्योग में सावधानी बरती जा रही है। SIAM का कहना है कि आने वाले समय में इन कारकों से मांग पर असर पड़ सकता है।
यह रिपोर्ट भारतीय ऑटो उद्योग के स्थायित्व और चुनौतियों के बीच बिक्री की मजबूती को दर्शाती है।