वाशिंगटन डी सी : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयानों से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। बुधवार को उन्होंने संकेत दिया था कि वे तेहरान के साथ टकराव को लंबा नहीं खींचना चाहते लेकिन अगले ही दिन उनका रुख बदल गया।
गुरुवार को उन्होंने ईरान के खिलाफ और कड़े कदम उठाने की चेतावनी दे दी। इस बदलाव का असर तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर दिखा। जिससे अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स करीब 2% तक गिर गए, जबकि कच्चे तेल की कीमत बढ़कर लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
हालांकि वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय बाजार ने अलग रुख अपनाया। सुबह के कारोबार में भारी गिरावट के बावजूद दिन के अंत तक BSE Sensex फिर से लाभ की ओर बढ़ा। इस सुधार के पीछे रुपये की मजबूती प्रमुख कारण रही, जिससे निवेशकों को राहत मिली।
विदेशी मुद्रा बाजार में भी गुरुवार को खासा उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार शुरू होते ही डॉलर के मुकाबले रुपया तेजी से मजबूत हुआ और दिन के अंत तक इसमें करीब 1.8% की बढ़त दर्ज की गई। रुपया 93.10 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया, जो 2013 के बाद एक दिन में उसका सबसे अच्छा प्रदर्शन माना जा रहा है। हालांकि दोपरहर के सत्र सें एक समय ऐसा भी आया जब डॉलर की कीमत घटकर 92.83 रुपये तक पहुंच गई थी, लेकिन यह स्तर ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सका।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मजबूती के पीछे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के हालिया कदमों की अहम भूमिका रही है। केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टा गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। बैंकों को नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स पर रोक लगाने और पुराने सौदों को दोबारा शुरू करने से भी मना किया गया है। इन फैसलों की वजह से ऑफशोर और ऑनशोर बाजारों में सट्टा कारोबार लगभग थम गया, जिससे रुपये को मजबूती मिली।
वैश्विक दबाव के बावजूद घरेलू बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 185 अंकों की बढ़त के साथ 73 हजार 319 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 33 अंक चढ़कर 22 हजार 713 के स्तर पर पहुंच गया।