नई दिल्ली : भारत में महिलाएं अब भी निवेश के क्षेत्र में पीछे हैं, हालांकि उनकी बचत की आदतें लगातार बढ़ रही हैं। ‘द वेल्थ कंपनी म्यूचुअल फंड’ द्वारा हाल ही में प्रकाशित रिपोर्ट 'हर वेल्थ, हर वे: ए स्टडी ऑन हाउ वुमन सेव एंड इन्वेस्ट' में सामने आया है कि देश भर की महिलाएं नियमित रूप से पैसा जमा करती हैं, लेकिन अधिक लाभ देने वाले निवेश साधनों जैसे शेयर, म्यूचुअल फंड और ईटीएफ की ओर उनका कदम अभी सीमित है।
रिपोर्ट के अनुसार करीब 70 प्रतिशत भारतीय महिलाएं हर महीने नियमित रूप से बचत करती हैं। लेकिन इनमें से केवल 40 प्रतिशत ही पारंपरिक निवेश विकल्पों जैसे एफडी या सोने से आगे बढ़कर आधुनिक निवेश साधनों की ओर बढ़ रही हैं। इस अध्ययन में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पुणे, अहमदाबाद, लखनऊ, जयपुर, नागपुर, रांची, भोपाल, गुवाहाटी और मदुरै जैसे शहरों की लगभग 2 हजार महिलाओं को शामिल किया गया।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी सकारात्मक संकेत दिखता है कि युवा महिलाएं निवेश में तेजी से भागीदारी कर रही हैं। वर्तमान में म्यूचुअल फंड के एसआईपी निवेशकों में से आधे की उम्र 30 साल से कम है। डिजिटल सुविधाओं और आर्थिक स्वतंत्रता की वजह से इस बदलाव को संभव माना जा रहा है। छोटे और मध्यम शहरों में भी महिलाओं का निवेश बढ़ रहा है; टियर-2 शहरों में महिलाओं की संख्या पिछले साल की तुलना में लगभग ढाई गुना बढ़ी, जबकि टियर-4 या उदयशील शहरों में यह वृद्धि 140 प्रतिशत तक पहुंच गई।
मधु लूनावाट, एमडी और सीईओ, द वेल्थ कंपनी म्यूचुअल फंड के अनुसार भारतीय महिलाएं में हमेशा से सुसंगठित रूप से बचत करने की आदत हैं। अब वे अपनी बचत को योजनाबद्ध निवेश की दिशा में ले जा रही हैं, जो संपत्ति निर्माण के लिहाज से देश को एक मजबूत मार्ग दिखाएगा।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि निवेश में आत्मविश्वास की कमी अभी भी बड़ी बाधा है। आधे से अधिक महिलाएं निवेश निर्णयों के लिए अपने परिवार के पुरुष सदस्यों पर निर्भर रहती हैं, विशेष रूप से छोटे शहरों में। लेकिन म्यूचुअल फंड की दुनिया में एक बार कदम रखने के बाद अधिकांश महिलाएं वहां स्थायी रूप से बनी रहती हैं।
लगभग 86 प्रतिशत महिलाएं अगले पांच वर्षों में अपने निवेश को बढ़ाने की योजना बना रही हैं। इसके अलावा म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाली महिलाओं में 82 प्रतिशत अब पारिवारिक वित्तीय निर्णयों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
अध्ययन में यह भी देखा गया कि कम आय वाली महिलाओं में से 64 प्रतिशत एसआईपी को पसंद करती हैं। म्यूचुअल फंड में पहले से निवेश कर रही महिलाओं में से 43 प्रतिशत ने बताया कि उन्हें निवेश जारी रखने में कोई बाधा नहीं आती। अनुभव बढ़ने के साथ महिलाओं का म्यूचुअल फंड में भरोसा चार गुना तक बढ़ जाता है। कुल मिलाकर यह रिपोर्ट संकेत देती है कि भविष्य में भारतीय महिलाएं निवेश के क्षेत्र में एक बड़ी ताकत बनकर उभरने वाली हैं।