नई दिल्ली : भारतीय रक्षा क्षेत्र से जुड़ी एक अहम परियोजना में देरी को लेकर Hindustan Aeronautics Limited ने सख्त रुख अपनाया है। तेजस हल्के लड़ाकू विमान Mk-1A के लिए इंजन आपूर्ति में देरी होने पर कंपनी ने अमेरिकी फर्म GE Aerospace पर जुर्माना लगाया है। यह जानकारी HAL के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक D K Sunil ने दी।
HAL के अनुसार दोनों कंपनियों के बीच हुए समझौते में स्पष्ट प्रावधान है कि F404-IN20 इंजन की डिलीवरी में देरी होने पर मुआवजा देना होगा। इसी शर्त के तहत यह कार्रवाई की गई है।
कंपनी का कहना है कि वह इस साल दिसंबर तक भारतीय वायुसेना को 20 से अधिक Tejas Mk-1A विमान सौंपने की योजना पर काम कर रही है। हालांकि अब तक 99 इंजनों के ऑर्डर में से केवल 6 इंजन ही प्राप्त हुए हैं।
पहला इंजन मार्च 2025 में मिला था, जबकि छठे इंजन की डिलीवरी इसी महीने के अंत तक मिलने की उम्मीद जताई गई है। HAL का मानना है कि जैसे-जैसे इंजन मिलते जाएंगे, उत्पादन प्रक्रिया में तेजी आएगी।
इस परियोजना की शुरुआत फरवरी 2021 में हुई थी, जब रक्षा मंत्रालय ने HAL के साथ करीब 48 हजार करोड़ रुपये का करार किया था। इसके तहत 83 तेजस Mk-1A लड़ाकू विमान तैयार किए जाने हैं। शुरुआत में इन विमानों की डिलीवरी मार्च 2024 से शुरू होनी थी लेकिन इंजन आपूर्ति में देरी और तकनीकी प्रमाणन से जुड़ी समस्याओं के कारण कार्यक्रम में देरी हुई।
दूसरी ओर GE Aerospace ने देरी के लिए वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं को जिम्मेदार ठहराया है। कंपनी का कहना है कि वह उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है ताकि लंबित ऑर्डर जल्द पूरे किए जा सकें।
इसी बीच तकनीकी समस्याओं के कारण कुछ समय के लिए रोके गए तेजस विमान अब फिर से उड़ान भरने के लिए तैयार हैं। फरवरी में एक विमान के रनवे से आगे निकल जाने के बाद ब्रेक सिस्टम में खामी पाई गई थी, जिसकी वजह से पूरे बेड़े को अस्थायी रूप से रोका गया था। अब इस समस्या का समाधान कर लिया गया है और आवश्यक मंजूरी भी मिल चुकी है। HAL के अनुसार अप्रैल से तेजस विमानों की नियमित उड़ान फिर से शुरू होने की संभावना है।