देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि देश सफलता की शानदार कहानी लिख रहा है। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि भारत जो कभी केवल हथियारों के आयात के लिए जाना जाता था। वह अब निर्यात के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने रक्षा निर्यात में इस 'बड़ी छलांग' को स्वदेशी रक्षा क्षमताओं पर बढ़ते वैश्विक भरोसे का प्रतीक बताया। इसके साथ ही उन्होंने रक्षा सौदे से संबंधित कई महत्वपूर्ण आंकड़े भी पेश किए।
कई गुना बढ़ा रक्षा निर्यात
राजनाथ सिंह ने अपने पोस्ट में कहा कि साल 2014 में जब भारत का रक्षा निर्यात महज 600 करोड़ रुपए हुआ करता था वह अब बढ़कर 38,500 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। वहीं अगर पिछले वित्तीय वर्ष के साथ इस साल की तुलना करें तो रक्षा निर्यात में करीब 62.66 फीसदी की वृद्धि बतायी जाती है। पिछले वित्तीय वर्ष में यह 23,622 करोड़ रुपए था जो वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। वहीं वर्ष 2023-24 में भारत का रक्षा निर्यात करीब 21,083 करोड़ रुपये था।
रक्षा मंत्री ने इस उपलब्धि में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSU) के योगदान को जमकर सराहा। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि में DPSU का योगदान 54.84 प्रतिशत रहा है। वहीं निजी उद्योगों का योगदान 45.16 प्रतिशत रहा है।
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भारत से कौन से हथियारों की है सबसे ज्यादा मांग?
भारत पिछले कुछ समय से लगातार अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत बनाने में जुटा हुआ है। इसके लिए अत्याधुनिक हथियारों पर ध्यान तो केंद्रीय किया गया है लेकिन भारत इन दिनों स्वदेशी हथियारों पर अपना पूरा ध्यान लगा रहा है। इसी वजह से भारत का रक्षा निर्यात इस वक्त अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। NBT की मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार खासतौर पर ऑपरेशन सिन्दूर में पाकिस्तान को धुल चटाने में भारत के स्वदेशी हथियारों के कमाल ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है।
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इस वक्त रक्षा निर्यात के लिए जिन हथियारों की है सबसे ज्यादा मांग -
ब्रह्मोस मिसाइल - ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल की मांग इस समय सबसे ज्यादा है। ब्रह्मोस करीब 300 किलोमीटर की दूरी तक सटीकता के साथ वार करने में सक्षम है। इसी वजह से फिलीपींस, वियतनाम, इंडोनेशिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने इसमें अपनी दिलचस्पी दिखाई है और भारत के साथ बातचीत कर रहे हैं।
तेजस - एक भारतीय सिंगल-इंजन, चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान है। भारत में बना सुपरसोनिक फाइटर जेट है जो हवा से हवा और जमीन पर निशाना साधने में सक्षम है। नमें अर्जेंटीना, मलेशिया, फिलीपींस और नाइजीरिया अपनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
आकाश मिसाइल - यह भारत का स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम है। सऊदी अरब, वियतनाम और केन्या ऐसे देशों में शुमार हैं जो इस एयर डिफेंस सिस्टम में काफी दिलचस्पी ले रहे हैं।
पिनाका रॉकेट लॉन्चर - भारत के मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर की मांग कई देशों में है। इसमें एक साथ कई रॉकेट दागने की क्षमता इसे और भी खास बनाता है। यह जीपीएस तकनीक से भी काम करता है। मिसाइल की रेंज करीब 75 से 120 किलोमीटर बतायी जाती है। आर्मेनिया को ये सिस्टम भेजा जा चुका है। इसके अलावा अफ्रीकी और कुछ दक्षिण अमेरिकी देशों से भी इस मिसाइल के निर्यात को लेकर बातचीत चल रही है।
अर्जुन टैंक - इस युद्धक टैंक को DRDO ने तैयार किया है जो एडवांस फायर कंट्रोल सिस्टम और नाइट विजन तकनीक से लैस है। अफ्रीकी देशों के साथ ही नाइजीरिया और केन्या के साथ इस टैंक को लेकर बातचीत चल रही है।