नई दिल्लीः देश में महंगाई के मोर्चे पर एक बार फिर दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलो के व्यावसायिक एलपीजी (कमर्शियल LPG) सिलेंडर की कीमतों में बड़ी वृद्धि कर दी है। राजधानी दिल्ली में इसकी कीमत 195.50 रुपये बढ़कर अब 2,078.50 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई है।
यह लगातार दूसरा महीना है जब कमर्शियल गैस के दाम बढ़े हैं। इससे पहले 1 मार्च को भी 114.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जिससे कुल मिलाकर कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
महानगरों में नई दरें
कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर देश के सभी प्रमुख शहरों में देखा गया है।
कोलकाता में 218 रुपये की वृद्धि के साथ कीमत 2,208.50 रुपये पहुंच गई है।
मुंबई में यह 2,031 रुपये प्रति सिलेंडर हो गई है।
चेन्नई में नई कीमत 2,246.50 रुपये दर्ज की गई है।
यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आए बदलावों का असर सीधे घरेलू व्यावसायिक गतिविधियों पर पड़ रहा है।
कैसे तय होती हैं LPG की कीमतें ?
एलपीजी की कीमतें हर महीने की पहली तारीख को संशोधित की जाती हैं। यह प्रक्रिया देश की प्रमुख तेल कंपनियों-इंडियन ऑयल कार्पोरेशन (Indian Oil Corporation), भारत पेट्रोलियम (Bharat Petroleum) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (Hindustan Petroleum) द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाजार के बेंचमार्क, कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपया विनिमय दर को ध्यान में रखते हुए तय की जाती है।
घरेलू उपभोक्ताओं को राहत बरकरार
जहां एक ओर कमर्शियल एलपीजी महंगी हुई है, वहीं घरेलू उपयोग के 14.2 किलो वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में इसकी कीमत अभी भी 913 रुपये बनी हुई है।
हालांकि, हाल ही में 7 मार्च को इसमें 60 रुपये की वृद्धि की गई थी। सरकार की उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी के कारण पात्र लाभार्थियों पर इसका असर सीमित रहता है, लेकिन गैर-सब्सिडी उपभोक्ताओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण खर्च बना हुआ है।
व्यवसायों पर बढ़ेगा असर
कमर्शियल एलपीजी का उपयोग मुख्य रूप से होटल, रेस्तरां, ढाबों और छोटे उद्योगों में होता है। ऐसे में कीमतों में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर इन क्षेत्रों की लागत को बढ़ाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान जारी रहा, तो खाने-पीने की चीजों और सेवाओं की कीमतों में भी वृद्धि देखने को मिल सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष असर पड़ेगा।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता
इसके विपरीत, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल स्थिरता बनी हुई है। मार्च 2025 में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती के बाद से इनके दामों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर है
डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है
सरकार वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद इनकी कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है।
वैश्विक परिदृश्य: क्यों बढ़ रही हैं कीमतें ?
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। ईरान से जुड़े तनाव और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, पर बढ़ते दबाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। यदि यह स्थिति और बिगड़ती है, तो आने वाले समय में ऊर्जा कीमतों में और उछाल की आशंका जताई जा रही है।
भारत पर व्यापक प्रभाव
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है और अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में वैश्विक कीमतों में कोई भी बदलाव सीधे देश की अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं पर असर डालता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कमर्शियल एलपीजी की बढ़ती कीमतें छोटे व्यवसायों के लिए चुनौती बन सकती हैं, जबकि सरकार के सामने महंगाई को नियंत्रित रखने की बड़ी जिम्मेदारी है।
कुल मिलाकर, कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी कारोबारियों के लिए चिंता का कारण है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली हुई है। आने वाले महीनों में वैश्विक हालात और सरकार के कदम तय करेंगे कि महंगाई का यह दबाव कितना बढ़ेगा।