नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने आगामी जनगणना 2027 के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। अब लिव-इन संबंध में रहने वाले जोड़ों को कुछ शर्तों के आधार पर ‘विवाहित’ दंपति के रूप में दर्ज किया जाएगा। इस निर्णय को समाज में बदलते रिश्तों की स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है हालांकि इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि कोई जोड़ा अपने संबंध को स्थायी मानता है तो वह स्वयं-घोषणा (Self-Enumeration) के दौरान इसे स्पष्ट कर सकता है। ऐसी स्थिति में जनगणना के रिकॉर्ड में उनका वैवाहिक दर्जा ‘Married’ के रूप में दर्ज किया जाएगा। इसके लिए किसी अतिरिक्त दस्तावेज या प्रमाण की आवश्यकता नहीं होगी।
सूत्रों के अनुसार समाज में विवाह को लेकर पारंपरिक सोच में बदलाव को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। हालांकि ‘स्थायी संबंध’ की स्पष्ट परिभाषा अभी तक तय नहीं की गई है जिससे इस नियम की व्याख्या को लेकर असमंजस बना हुआ है।
जनगणना 2027 दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा जिसमें घरों और परिवारों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा जिसमें जनसंख्या से जुड़े विस्तृत आंकड़े, जैसे वैवाहिक स्थिति, दर्ज किए जाएंगे।
सरकारी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पूरी प्रक्रिया व्यक्ति द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित होगी और उसी के अनुसार आंकड़े दर्ज किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि पहले भी अनौपचारिक रूप से कुछ मामलों में लिव-इन जोड़ों को विवाहित के रूप में दर्ज किया जाता रहा है लेकिन इस बार इसे स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम आधुनिक सामाजिक वास्तविकताओं को स्वीकार करने की दिशा में एक अहम पहल है भले ही कानूनी रूप से लिव-इन संबंध अभी विवाह के बराबर नहीं हैं।