नोआपाड़ा के तृणमूल विधायक सुनील सिंह ने सोमवार को पार्टी छोड़ने की घोषणा की। सिर्फ इतना ही नहीं वह भाजपा में शामिल होंगे और भाजपा प्रत्याशी व अर्जुन सिंह के समर्थन में प्रचार भी करेंगे। सुनील सिंह ने कहा कि उन्हें किसी पार्टी के प्रतीक की जरूरत नहीं होती है। वर्ष 1993 में वह निर्दलीय चुनाव लड़कर ही पार्षद चुने गए थे। पिछले 25 सालों से वह पार्षद, एक बार विधायक और तीन बार नगर निकाय के चेयरमैन भी रह चुके हैं।
बता दें, सुनील सिंह भाजपा प्रत्याशी अर्जुन सिंह के साढू हैं। वर्ष 2019 में तृणमूल छोड़कर सुनील सिंह भाजपा में शामिल हुए थे और 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर खड़े भी हुए थे। तृणमूल उम्मीदवार मंजू बसु ने नोआपाड़ा में सुनील सिंह को हराया था।
इसके बाद 2022 में वह फिर से तृणमूल में वापस लौटे लेकिन विधानसभा के समय एक बार फिर से उनके पार्टी बदलने की चर्चाएं तेज हैं। सुनील सिंह का आरोप है कि 2022 से 2026 के बीच तृणमूल ने उन्हें किसी काम में नहीं लगाया। सिर्फ बैठा कर रखा था।
सुनील सिंह का कहना है कि मैंने आज तृणमूल छोड़ दिया। अगर को पार्टी भरोसा न हो तो उस पार्टी में रहने का कोई मतलब नहीं। 2022 में पार्टी में मुझे शामिल करवाया गया था लेकिन 2026 तक किसी काम में नहीं लगाया गया। बैठा कर रखा गया था। इसकी सिर्फ एक वजह है कि मैं अर्जुन सिंह का रिश्तेदार हूं। लेकिन हमारे बीच काफी दूर का रिश्ता है। इसके बावजूद अगर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं तो वहां एक पल भी रुकना सही नहीं है।
गौरतलब है कि नोआपाड़ा सीट से इस बार तृणांकुर भट्टाचार्य को तृणमूल ने टिकट दिया है। सुनील सिंह को इलेक्शन कमेटी का कन्वेनर बनाया गया है। इसके बाद से ही चर्चाएं तेज हो गयी थी कि क्या सुनील सिंह फिर से भाजपा में शामिल होंगे? सुनील सिंह का कहना है कि इलेक्शन कमेटी में रखा गया है वह तृणमूल का मामला है।
उन लोगों ने कहा था कि नोआपाड़ा विधानसभा में मुझे इलेक्शन कमेटी का कन्वेनर बनाया जा रहा है। मुझसे कहा गया कि गारुलिया नगर पालिका का कन्वेनर बनाने की बात कही गयी। मैंने तभी अपनी आपत्ति जतायी क्योंकि 2022 से 2026 के बीच किसी भी पार्षद से मेरी कोई बात ही नहीं हुआ। मैं कन्वेनर बनकर क्या करुंगा?