पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Election 2026) की घोषणा के बाद से ही चुनाव आयोग ने एक के बाद एक सचिव, अधिकारियों, ओसी, बीडीओ और यहां तक कि पुलिस कमिश्नर तक का तबादला किया है। इसे लेकर केंद्र सरकार और राष्ट्रीय चुनाव आयोग के साथ राज्य सरकार का संघर्ष लगातार जारी है।
इस बीच रविवार की शाम को एक बार फिर से चुनाव आयोग ने राज्य के 173 थाना के ओसी और आईसी का तबादला करने का आदेश जारी किया है। कुल मिलाकर 184 पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण का आदेश दिया गया है। रविवार की दोपहर को 18 जिलों के 83 बीडीओ के तबादले का आदेश भी जारी किया गया है।
रविवार को एक दिन में चुनाव आयोग ने राज्य के ओसी से लेकर बीडीओर तक कुल 267 अधिकारियों का तबादला किया। इस आदेश को चुनौती देते हुए सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) में वकील कल्याण बनर्जी (Kalyan Banerjee) ने मामला दायर किया है।
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मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल की खंडपीठ में मामला दायर करने की अनुमति मांगते हुए उन्होंने दृष्टि आकर्षित किया है। इसके साथ ही इस मामले की जल्द से जल्द सुनवाई का आवेदन भी किया है। मुख्य न्यायाधीश ने मामला दायर करने की अनुमति दी है। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई हो सकती है।
गौरतलब है कि 16 मार्च को जैसे ही चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा की, राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गयी। उसी दिन पहले मुख्य सचिव, गृह सचिव का तबादला कर दिया गया। इसके बाद डीजीपी से लेकर विभिन्न जिलों के डीएम-एसपी आदि को भी चुनाव आयोग ने स्थानांतरित किया। ओसी व बीडीओ को भी हटा दिया गया। राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल का आरोप है कि इतनी भारी संख्या में अधिकारियों का तबादला राजनैतिक कारणों की वजह से ही किया जा रहा है।
हालांकि गत शनिवार को कोलकाता के दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि अधिकारियों का रद-बदल कोई अस्वाभाविक घटना नहीं है। जिन राज्यों में चुनाव होते हैं वहां यह सामान्य प्रक्रिया है। हालांकि अन्य राज्यों में चुनाव के समय भी इतनी भारी संख्या में अधिकारियों का तबादला नहीं होता है। इस मामले में ही अब हाई कोर्ट में तृणमूल सांसद व वकील कल्याण बनर्जी ने मामला दायर किया है।