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बिहार विधान परिषद की सदस्यता से नीतीश का इस्तीफा, अब संसद में निभाएंगे अहम भूमिका

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से बदल सकते हैं बिहार के राजनीतिक समीकरण

By डॉ. अभिज्ञात

Mar 30, 2026 12:53 IST

पटना/नयी दिल्लीः बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद (एमएलसी) की अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया, जिसे उनके राजनीतिक सफर में एक अहम बदलाव माना जा रहा है। राज्यसभा में जाने के चलते उन्होंने राज्य की विधान परिषद की सदस्यता छोड़ दी।

5 मार्च को 75 वर्षीय नेता ने एक भावुक संदेश जारी करते हुए अपने फैसले की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि वे बिहार विधानसभा और संसद के दोनों सदनों का हिस्सा बनने की इच्छा रखते थे। साथ ही उन्होंने विकसित बिहार के निर्माण के अपने संकल्प को दोहराया और नई सरकार को सहयोग व मार्गदर्शन देने की बात कही।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने उनके इस फैसले का स्वागत किया और संसदीय राजनीति में उनकी वापसी की सराहना की।

इससे कुछ दिन पहले ही उन्हें जनता दल (यूनाइटेड) का राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वसम्मति से चुना गया था क्योंकि इस पद के लिए कोई अन्य उम्मीदवार सामने नहीं आया।

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर गठबंधन की राजनीति का एक अनोखा उदाहरण रहा है। उन्होंने 1985 में विधायक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और बाद में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे। वर्ष 2005 में वे पहली बार एनडीए के सहयोग से बिहार के मुख्यमंत्री बने।

2013 के बाद से उनकी राजनीति में कई बार बड़े बदलाव देखने को मिले। उन्होंने अलग-अलग समय पर भारतीय जनता पार्टी और महागठबंधन (राजद-कांग्रेस) के साथ गठबंधन किया—2013, 2017, 2022 और 2024 में उनके राजनीतिक समीकरण बदले। इसके बावजूद उनकी पकड़ बनी रही और 2025 में उन्होंने लगातार पांचवीं बड़ी जीत हासिल कर रिकॉर्ड दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

राज्यसभा में उनकी नई भूमिका से बिहार की राजनीति पर असर पड़ सकता है। माना जा रहा है कि इससे राज्य में भाजपा का प्रभाव बढ़ सकता है और पटना में नए नेतृत्व के लिए रास्ता खुल सकता है।

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