भागलपुरः बिहार की राजनीति एक बार फिर हलचल में है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने दावा किया है कि राज्य के अगले मुख्यमंत्री का चेहरा आखिरकार नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और अमित शाह (Amit Shah) ही तय करेंगे। रविवार को भागलपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए किशोर ने कहा कि मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को स्वास्थ्य कारणों के चलते पद से हटाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ एनडीए ने बिहार की जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं किया।
किशोर ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य के युवाओं से एक करोड़ नौकरियों का वादा किया गया था, लेकिन अब तक उस दिशा में ठोस प्रगति नहीं दिखी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री वही बनेगा, जिसे केंद्र का नेतृत्व पसंद करेगा।
नीतीश कुमार का लंबा राजनीतिक सफर
नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। वर्ष 2005 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कई बार सत्ता संभाली और अलग-अलग राजनीतिक गठबंधनों के साथ काम किया। 2013, 2017, 2022 और 2024 में उन्होंने भाजपा और महागठबंधन के बीच गठबंधन बदले, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ बनी रही।
2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिला। 243 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन ने 202 सीटें जीतीं, जिसमें भाजपा को 89 और जद(यू) को 85 सीटें हासिल हुईं। इसके बाद नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
हालांकि मार्च 2026 में उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर नया संकेत दिया। 5 मार्च को अमित शाह की मौजूदगी में नामांकन हुआ और 16 मार्च को वे निर्वाचित भी हो गए। उन्होंने नई सरकार को समर्थन देने की बात कही, लेकिन उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने की अटकलें तेज हो गई हैं।
सेहत पर सवाल और राजनीतिक आरोप
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि चुनाव से पहले ही नीतीश कुमार की तबीयत ठीक नहीं थी और यही कारण है कि अब उन्हें सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे अलग किया जा रहा है। उन्होंने जद(यू) और भाजपा पर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया।
नीतीश कुमार की उम्र 75 वर्ष हो चुकी है और हाल के महीनों में उनकी सेहत को लेकर चर्चाएं भी सामने आई हैं। कई रिपोर्टों में यह संकेत दिया गया कि स्वास्थ्य कारणों से ही उन्होंने राज्यसभा का रास्ता चुना। हालांकि एनडीए नेताओं ने उनके इस फैसले का स्वागत किया और उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
बदलते समीकरण और आगे की राह
नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। करीब दो दशकों तक राज्य की कमान संभालने के बाद अब उनकी भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ सकती है। इस बीच यह चर्चा भी तेज है कि भाजपा बिहार में अपना पहला मुख्यमंत्री बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में एनडीए के भीतर नेतृत्व को लेकर मंथन तेज होने की संभावना है।
प्रशांत किशोर का बयान ऐसे समय में आया है, जब राज्य में नए नेतृत्व को लेकर अटकलें तेज हैं। बेरोजगारी, विकास और वादों की पूर्ति जैसे मुद्दे अभी भी राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि बिहार की सत्ता की कमान किसके हाथ में जाएगी, लेकिन इतना तय है कि इस फैसले में केंद्र की भूमिका अहम रहने वाली है।