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“महंगे तेल ने बिगाड़ा खेल, शेयर बाजार में तेज बिकवाली”

वेस्ट एशिया संकट का असर, निफ्टी 1.18% टूटा। विशेषज्ञों ने जताई आगे भी अस्थिरता की आशंका।

By श्वेता सि्ंह

Mar 30, 2026 13:38 IST

मुंबईः सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। दलाल स्ट्रीट पर सोमवार सुबह से ही बिकवाली का दबाव बना रहा, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखे। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

कारोबार की शुरुआत में ही निफ्टी 50 करीब 269.95 अंक यानी 1.18 प्रतिशत गिरकर 22,549.65 पर खुला। वहीं बीएसई सेंसेक्स 980.15 अंक या 1.33 प्रतिशत टूटकर 72,603.07 के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती घंटों में ही बाजार में व्यापक बिकवाली देखी गई, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा।

विश्लेषकों के अनुसार बाजार में गिरावट की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है। इस क्षेत्र में ऊर्जा ठिकानों पर हमलों के चलते सप्लाई चेन पर असर पड़ा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गया है।

बाजार विशेषज्ञ अजय बग्गा ने मौजूदा हालात को जटिल बताते हुए कहा कि वित्तीय दुनिया इस समय कई संकटों से एक साथ जूझ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह स्थिति 2007 जैसे शुरुआती संकेत दे सकती है, जो आगे चलकर बड़े आर्थिक संकट का रूप ले सकती है। उन्होंने निजी कर्ज के बढ़ते जोखिम, फंड रिडेम्पशन के दबाव और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान को प्रमुख चिंताओं में गिना।

कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च प्रमुख श्रीकांत चौहान का कहना है कि निकट अवधि में बाजार का रुख अत्यधिक अस्थिर बना रह सकता है। उन्होंने निवेशकों और ट्रेडर्स को सतर्क रहने और महत्वपूर्ण स्तरों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है।

गिरावट का असर केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि व्यापक बाजार भी दबाव में आ गया। निफ्टी 100 में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में क्रमशः 1.32 प्रतिशत और 1.18 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई।

सेक्टोरल स्तर पर भी सभी प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में रहे। ऑटो, आईटी, मीडिया, ऑयल एंड गैस और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में एक से डेढ़ प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ संकेत मिलता है कि बाजार में बिकवाली व्यापक स्तर पर हुई है।

तकनीकी दृष्टि से बाजार के लिए कुछ अहम स्तर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। निफ्टी के लिए 23,000 और सेंसेक्स के लिए 74,500 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस माना जा रहा है। यदि बाजार इन स्तरों के नीचे बना रहता है, तो निफ्टी 22,500 से 22,650 और सेंसेक्स 73,000 से 73,300 के दायरे तक फिसल सकता है। गिरावट और बढ़ने पर निफ्टी 22,000 से 22,200 तथा सेंसेक्स 71,500 से 72,100 तक जा सकता है। वहीं, सुधार की स्थिति में निफ्टी 23,400 से 23,500 और सेंसेक्स 75,700 से 76,000 तक पहुंच सकता है।

वैश्विक बाजारों से भी कमजोर संकेत मिले हैं। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई 225 करीब 5 प्रतिशत तक गिर गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 4 प्रतिशत नीचे रहा। हांगकांग का हैंग सेंग, ताइवान और सिंगापुर के बाजार भी गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे।

अमेरिकी बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र में कमजोरी रही थी। डॉव जोन्स, एसएंडपी 500 और नैस्डैक सभी प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए थे, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

कमोडिटी बाजार की बात करें तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। वहीं सोने की कीमतों में हल्की मजबूती आई है और यह 24 कैरेट के लिए करीब 1,43,772 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। दूसरी ओर चांदी की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। बढ़ती महंगाई, ऊंचे कर्ज और कमजोर होती आर्थिक वृद्धि दर निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ा रही है। ऐसे में निवेशकों को सोच-समझकर कदम उठाने और बाजार के प्रमुख स्तरों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

(समाचार एई समय कहीं भी निवेश करने की सलाह नहीं देता है। शेयर बाजार या किसी भी निवेश में जोखिम होता है। निवेश से पहले पूरी जानकारी और विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है। यह खबर केवल शिक्षा और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।)

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