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रेमंड समूह के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का नहीं रहे, 87 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

रेमंड को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के साथ एडवेंचर और एविएशन में भी बनाई पहचान। कपड़ा उद्योग के दिग्गज और पद्म भूषण सम्मानित उद्योगपति की उपलब्धियों पर एक नजर...

By डॉ. अभिज्ञात

Mar 29, 2026 01:12 IST

मुंबईः प्रसिद्ध उद्योगपति और कपड़ा उद्योग के दिग्गज विजयपत सिंघानिया का शनिवार को मुंबई में 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे उन चुनिंदा कॉर्पोरेट नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने कारोबार के साथ-साथ रोमांच और विमानन के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई।

1980 में रेमंड समूह की कमान संभालने के बाद उन्होंने कंपनी को ऐसे समय में आगे बढ़ाया, जब देश में आर्थिक उदारीकरण से पहले का दौर था। उनकी दूरदर्शिता के चलते यह ब्रांड बदलते बाजार के दबावों के बीच भी मजबूती से खड़ा रहा, जबकि कई पुराने ब्रांड पीछे रह गए।

सिंघानिया सिर्फ उद्योग जगत तक सीमित नहीं थे, बल्कि उन्हें उड़ान और रोमांच का भी गहरा शौक था। वे उन दुर्लभ उद्योगपतियों में थे, जो बोर्डरूम के बाहर भी जोखिम भरे कारनामों के लिए जाने जाते थे।

उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें देश का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म भूषण दिया गया। उन्हें साहसिक गतिविधियों के लिए तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। विमानन और एडवेंचर के क्षेत्र में उन्होंने कई रिकॉर्ड बनाए। वर्ष 2005 में उन्होंने हॉट एयर बैलून से लगभग 69,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले 1988 में उन्होंने माइक्रोलाइट विमान से लंदन से नई दिल्ली तक अकेले उड़ान भरते हुए 23 दिनों में दूरी तय कर एक और उपलब्धि हासिल की थी। उनके उड़ान अनुभव को देखते हुए 1994 में भारतीय वायुसेना ने उन्हें मानद एयर कमोडोर की उपाधि दी। वहीं, 2006 में उन्हें मुंबई का शेरिफ भी नियुक्त किया गया।

व्यापार के क्षेत्र में उन्होंने रेमंड को केवल कपड़ा उद्योग तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सिंथेटिक फैब्रिक, डेनिम, स्टील, औद्योगिक उपकरण और सीमेंट जैसे कई क्षेत्रों में विस्तार किया, जिससे यह एक विविध उद्योग समूह बन गया। साल 2007 में उन्हें भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद की गवर्निंग काउंसिल का अध्यक्ष बनाया गया, जहां उन्होंने 2012 तक अपनी जिम्मेदारी निभाई।

उन्होंने वर्ष 2000 में रेमंड समूह की कमान अपने बेटे गौतम सिंहानिया को सौंप दी थी, लेकिन इसके बाद भी वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे। हालांकि पिछले कुछ समय से उनकी सार्वजनिक मौजूदगी कम हो गई थी। कुछ साल पहले पिता-पुत्र के बीच कानूनी विवाद भी सामने आया था, लेकिन बाद में दोनों के बीच मतभेद सुलझ जाने की खबरें आई थीं।


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