नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर 10 रुपये की एक्साइज ड्यूटी कम कर दी है। यह जानकारी शुक्रवार को आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन के माध्यम से साझा की गई।
इस कदम के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपना मत साझा किया है। वे कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि के बावजूद केंद्र ने घरेलू रिटेल कीमतों को बढ़ाने से बचाया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी इस फैसले का मूल कारण विस्तार से समझाया।
पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी परिस्थितियों की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर जा रही हैं। इसके परिणामस्वरूप देश की तेल कंपनियों का इनपुट कॉस्ट काफी बढ़ गया है।
आम जनता पर कीमतों का असर न पड़े, इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने यह राहत कदम उठाया है। इसका मतलब यह है कि अंतरराष्ट्रीय तेल मूल्य वृद्धि का भार तेल कंपनियों को सहना होगा, जबकि आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
हरदीप सिंह पुरी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसका असर वैश्विक स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ा है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में कीमतों में 30-50% की वृद्धि हुई, उत्तर अमेरिका में 30%, यूरोप में लगभग 20% और अफ्रीका में 50% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
प्रधानमंत्री मोदी के सामने दो विकल्प थे। पहला अन्य देशों की तरह पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज वृद्धि करना। दूसरा अंतरराष्ट्रीय मूल्य अस्थिरता का असर भारतीय नागरिकों पर न पड़ने देना।
सरकार ने आम जनता के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए दूसरा विकल्प अपनाया। पुरी ने स्पष्ट किया कि इस मूल्य अंतर का भार सरकार स्वयं सह रही है।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री ने एक बैठक में यह निर्णय लिया कि पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतों में वृद्धि नहीं की जाएगी। साथ ही अंतरराष्ट्रीय कीमतों की वृद्धि के दबाव को तेल कंपनियों पर हल्का करने के लिए यह कदम उठाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि देश में रिफाइन किए गए पेट्रोल और डीजल को अनियंत्रित रूप से निर्यात न किया जाए, इसके लिए सख्त निगरानी रखी जा रही है।