केंद्र सरकार ने शुक्रवार की सुबह पेट्रोल और डीजल पर से उत्पाद शुल्क को कम करने की घोषणा की। बताया जाता है कि पेट्रोल व डीजल पर प्रति लीटर आयात शुल्क को ₹10 घटाया जा रहा है। मिली जानकारी के अनुसार पश्चिम एशियाई तनाव की वजह से जब पूरी दुनिया ईंधन की कमी से जुझ रहा है ऐसे समय में भारत में पेट्रोल-डीजल के उत्पाद शुल्क को कम करना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस घोषणा से पहले तक प्रति लीटर पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क ₹13 होने वाला था वह अब घटकर ₹3 हो गया है। इस कमी की वजह से प्रति लीटर डीजल का उत्पाद शुल्क ₹10 से घटकर अब शून्य हो गया है।
अमेरिका-इजरायल से युद्ध की परिस्थिति में ईरान ने होर्मूज जलसंधि को बंद कर दिया है। इसके बाद विश्व भर में तेल की आपूर्ति बाधित हो रही है जिसका प्रभाव तेल की कीमतों पर भी पड़ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय मार्केट में अपरिशोधित तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। इसकी वजह से देश के विभिन्न ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का खर्च भी बढ़ गया है।
कई राष्ट्रीयकृत कंपनियों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस दबाव को कम करने के लिए ही देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी वृद्धि होने की संभावना पैदा हो गयी है। ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी को कम करने की घोषणा कर दी है।
वहीं दूसरी ओर एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) पर नया उत्पाद शुल्क लगाया गया है। प्रति लीटर ₹50 का शुल्क एविएशन टरबाइन फ्यूल पर लगाया गया है। इसके साथ ही ईंधन तेल के निर्यात को लेकर केंद्र ने कड़ा रुख अपनाया है। अन्य देशों को तेल निर्यात करने पर कई प्रतिबंध भी लगाए गए हैं। हालांकि श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान जैसे पड़ोसी देशों को इन प्रतिबंधों के दायरे से बाहर रखा गया है।
जानकारों का मानना है कि उत्पाद शुल्क को कम करने की वजह से देश की विभिन्न ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को फायदा होगा। इससे कंपनियां तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के झटके को कुछ हद तक संभाल सकेंगी। हालांकि इस कारण पेट्रोल और डीज़ल के खुदरा दाम कम होने की संभावना कम है। क्योंकि भारी नुकसान झेल रही कंपनियां इस राहत का इस्तेमाल अपने नुकसान को कुछ हद तक कम करने में करेंगी। इसलिए इसका फायदा खुदरा बाजार तक पहुंचने की संभावना कम है।