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Swiggy प्लेटफॉर्म की फीस हुई 17.58 रुपये : जानें हर ऑर्डर पर कितना बढ़ा खर्च

अगर ईंधन की कीमतों में इजाफा होता है, तो डिलीवरी से जुड़ी लागत को संतुलित करने के लिए कंपनियों को ऐसे कदम उठाने पड़ सकते हैं।

By राखी मल्लिक

Mar 25, 2026 12:39 IST

नई दिल्ली : ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेवाएं एक बार फिर महंगी हो गई हैं। देश के लोकप्रिय प्लेटफॉर्म Swiggy ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी कर दी है। अब हर ऑर्डर पर ग्राहकों को 17.58 रुपये (GST सहित) चुकाने होंगे, जबकि पहले यह शुल्क 14.99 रुपये था। यानी प्रति ऑर्डर लगभग 2.40 रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।

गौरतलब है कि हाल ही में Swiggy की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी Zomato ने भी इसी तरह फीस बढ़ाने का फैसला लिया था। ऐसे में दोनों बड़े प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों के लिए कुल खर्च बढ़ता दिख रहा है।

कंपनी के ऐप पर दी गई जानकारी के मुताबिक नई फीस लागू की जा चुकी है। इससे पहले सितंबर 2025 में इस शुल्क में बदलाव किया गया था। शुरुआत अगस्त 2023 में हुई थी, जब प्रति ऑर्डर 2 रुपये का प्लेटफॉर्म चार्ज जोड़ा गया था। उसके बाद से इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाता रहा है।

Swiggy और Zomato दोनों के लिए फूड डिलीवरी बिजनेस अब भी सबसे बड़ा कमाई का जरिया बना हुआ है। हालांकि कंपनियां क्विक कॉमर्स सेक्टर में तेजी से निवेश कर रही हैं लेकिन उनकी आमदनी का मुख्य आधार अभी भी यही सेगमेंट है।

कोविड के बाद इस क्षेत्र में कुछ गिरावट जरूर देखी गई थी लेकिन अब इसमें सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। खासतौर पर दिसंबर तिमाही में इस सेक्टर ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है।

इसी बीच बाजार में प्रतिस्पर्धा भी तेज हो रही है। Rapido ने ‘Ownly’ नाम से नई फूड डिलीवरी सेवा शुरू की है। जिसमें डिलीवरी चार्ज के अलावा कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता। वहीं Flipkart के भी इस क्षेत्र में उतरने की खबरें मिल रहीं हैं।

हालांकि ग्राहकों के लिए यह बढ़ोतरी बहुत बड़ी नहीं लग सकती लेकिन कंपनियों की कमाई पर इसका असर काफी अहम होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अतिरिक्त शुल्क से हर कंपनी को तिमाही आधार पर करीब 60 से 65 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हो सकती है, जो उनके लिए एक उच्च-लाभ वाला स्रोत है।

विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि इस बढ़ोतरी का ग्राहकों की मांग पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर ईंधन की कीमतों में इजाफा होता है, तो डिलीवरी से जुड़ी लागत को संतुलित करने के लिए कंपनियों को ऐसे कदम उठाने पड़ सकते हैं।

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