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एक क्लिक और सब ‘विचाराधीन’: बंगाल में वोटर लिस्ट ने बढ़ाई धड़कनें

सप्लिमेंट्री सूची जारी होते ही वेबसाइट और ऐप में आई समस्या, चुनाव आयोग ने बताया-यांत्रिक त्रुटि, देर रात बहाल हुई सेवा।

By श्वेता सिंह

Mar 25, 2026 00:41 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची को लेकर मंगलवार को एक असामान्य तकनीकी समस्या सामने आई, जिसने राज्यभर में मतदाताओं के बीच भ्रम और चिंता का माहौल पैदा कर दिया। चुनाव आयोग (Election Commission of India) की आधिकारिक वेबसाइट और ईसीआई नेट (ECI Net) मोबाइल ऐप पर बड़ी संख्या में मतदाताओं की स्थिति अचानक “विचाराधीन (Under Adjudication)” दिखने लगी।

करीब 7.04 करोड़ मतदाता जब अपने नाम की पुष्टि करने के लिए पोर्टल पर पहुंचे और ईपिक नंबर (EPIC Number) दर्ज किया, तो लगभग सभी को यही संदेश दिखाई दिया। इससे लोगों में यह आशंका फैलने लगी कि कहीं उनका नाम मतदाता सूची से हट तो नहीं गया या उनकी स्थिति संदिग्ध तो नहीं हो गई है।

यह समस्या पूरे दिन बनी रही और लाखों लोगों को अपने नाम की स्थिति समझने में परेशानी का सामना करना पड़ा। चुनावी माहौल के बीच इस तरह की गड़बड़ी ने स्वाभाविक रूप से चिंता बढ़ा दी।

चुनाव आयोग के सूत्रों ने बाद में स्पष्ट किया कि यह कोई साइबर हमला या हैकिंग की घटना नहीं थी, बल्कि सर्वर पर अधिक लोड और डेटा अपलोड प्रक्रिया के दौरान हुई यांत्रिक (Mechanical) त्रुटि का परिणाम था। आयोग ने बताया कि तकनीकी टीम ने समस्या को देर रात तक ठीक कर लिया और करीब 11:30 बजे के बाद वेबसाइट और ऐप फिर से सामान्य रूप से काम करने लगे।

इससे पहले भी सोमवार रात लगभग 11:55 बजे, जब सप्लिमेंट्री मतदाता सूची अपलोड की जा रही थी, तब वेबसाइट कुछ समय के लिए ठप हो गई थी। हालांकि, कुछ देर बाद सिस्टम बहाल हो गया था और मतदाता अपने विवरण देख पा रहे थे।

दरअसल, सोमवार देर रात स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत पहली सप्लिमेंट्री मतदाता सूची जारी की गई। 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित अंतिम सूची के अनुसार राज्य में कुल 7.04 करोड़ मतदाता हैं। इनमें से 60,06,675 नामों को “विचाराधीन (Under Adjudication)” श्रेणी में रखा गया था, जो कुल का लगभग 8.6 प्रतिशत है।

अब तक इन मामलों में से लगभग 29 लाख का निपटारा किया जा चुका है। हालांकि, चुनाव आयोग ने आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन निपटाए गए मामलों में कितने मतदाताओं के नाम सूची में जोड़े गए और कितनों के नाम हटाए गए। कुछ सूत्रों के अनुसार, करीब 10 लाख नाम हटाए जा सकते हैं, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

जानकारी के अनुसार, अभी शेष मामलों के निपटारे के लिए दूसरी और तीसरी सप्लिमेंट्री (पूरक) सूची भी आने वाले दिनों में जारी की जाएगी।

जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे अधिक “विचाराधीन (Under Adjudication)” मामले मुर्शिदाबाद में लगभग 11 लाख और मालदा में करीब 8.28 लाख दर्ज किए गए हैं। इन जिलों में विशेष रूप से दस्तावेजों की जांच पर ध्यान दिया जा रहा है।

यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) के निर्देश पर चल रही है। इसके तहत 705 न्यायिक अधिकारियों को दस्तावेजों की जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से फर्जी, दोहरे और अवैध नामों को हटाकर सूची को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है।

यदि किसी मतदाता का नाम सूची से हटाया जाता है, तो उसे 15 दिनों के भीतर अपील करने का अधिकार दिया गया है, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

मतदाताओं को सलाह दी गई है कि यदि उनका नाम पहले “विचाराधीन (Under Adjudication)” दिख रहा था या अभी भी कोई संदेह है, तो वे आधिकारिक वेबसाइट या ऐप के माध्यम से दोबारा जांच करें। इसके लिए ईपिक नंबर (EPIC Number), नाम और जन्मतिथि दर्ज करनी होगी। साथ ही, अपने जिले और विधानसभा क्षेत्र की सप्लिमेंट्री (पूरक) सूची डाउनलोड करके भी स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर स्थानीय ईआरओ (Electoral Registration Officer) या बीएलओ (Booth Level Officer) से संपर्क करने की भी सलाह दी गई है।

चुनाव आयोग ने आश्वासन दिया है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और बाकी मामलों का निपटारा जल्द किया जाएगा। मतदाताओं से अपील की गई है कि वे किसी भी अफवाह से बचें और केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर ही भरोसा करें। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल 2026 को होने हैं। ऐसे में सटीक और स्वच्छ मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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