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लोकसभा से ट्रांसजेंडर अधिकार संशोधन विधेयक 2026 पारित, आखिर इस बिल पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?

क्या हैं मुख्य प्रावधान और क्यों हो रहा है विरोध, परिभाषा में क्या बदला, self-identity पर आपत्ति क्यों..जानें सब कुछ

By डॉ. अभिज्ञात

Mar 24, 2026 22:43 IST

नई दिल्ली: लोकसभा ने मंगलवार को ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों से जुड़े संशोधन विधेयक 2026 को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। यह विधेयक वर्ष 2019 के मौजूदा कानून में बदलाव करता है। इस बिल को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेन्द्र कुमार ने सदन में पेश किया। नए संशोधन के तहत ट्रांसजेंडर की परिभाषा में बदलाव किया गया है, जिससे कुछ श्रेणियों को बाहर रखा गया है।

सरकार के अनुसार इस कानून का उद्देश्य ऐसे विशेष वर्ग को पहचान देना है, जो जैविक कारणों से सामाजिक भेदभाव और बहिष्कार का सामना करते हैं और उनके संरक्षण के लिए एक स्पष्ट ढांचा तैयार करना है।

नये घटनाक्रम के साथ ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े अधिकारों और पहचान को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। लोकसभा में पारित ट्रांसजेंडर पर्सन्स संशोधन विधेयक 2026 ने जहां सरकार के मकसद और नीति पर ध्यान खींचा है, वहीं इसके कुछ प्रावधानों को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।


बिल में क्या बदलाव किए गए हैं?

ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा को संशोधित किया गया है। इसमें किन्नर, हिजड़ा, अरावनी, जोगता जैसे पारंपरिक समुदाय शामिल हैं। साथ ही इंटरसेक्स और जन्मजात जैविक भिन्नता वाले लोगों को भी शामिल किया गया है लेकिन स्व-घोषित पहचान को इस संशोधन में शामिल नहीं किया गया है।


पहचान प्रमाण पत्र का क्या नियम है?

अब जिला मजिस्ट्रेट (DM) द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इसके लिए संबंधित प्राधिकरण की सिफारिश जरूरी होगी। जरूरत पड़ने पर मेडिकल विशेषज्ञों की राय भी ली जा सकती है।


सरकार का क्या कहना है?

सरकार के अनुसार यह संशोधन उन लोगों के लिए है जो जैविक कारणों से सामाजिक भेदभाव और बहिष्कार का सामना करते हैं और उनके अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह ढांचा बनाया गया है।


विवाद क्यों हो रहा है?

कई ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट और समुदाय के सदस्य इस बिल का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे self-identity का अधिकार कमजोर होता है। साथ ही यह भी आरोप है कि बिल को बिना पर्याप्त परामर्श के पारित किया गया।


राजनीतिक प्रतिक्रिया क्या ?

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस बिल को स्थायी समिति के पास न भेजने पर सवाल उठाए और कहा कि प्रभावित समुदाय की राय लेना जरूरी था।

आगे क्या?

बिल के कानून बनने के बाद इसका असर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की पहचान, अधिकारों और सरकारी प्रक्रियाओं पर पड़ेगा—जिसे लेकर बहस जारी रहने की संभावना है।

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