पटनाः बिहार में बिना लाइसेंस मांस और मछली बेचने वालों के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया है कि अब राज्य में बिना वैध लाइसेंस के मांस या मछली की बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी और खुले में चल रही दुकानों पर भी कार्रवाई होगी।
सरकार का कहना है कि यह कोई नया कानून नहीं, बल्कि पहले से लागू नियमों को सख्ती से जमीन पर लागू करने की पहल है। इसके तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक सद्भाव को ध्यान में रखते हुए निगरानी बढ़ाई जा रही है।
सरकार का फोकस और अभियान
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि मांस की दुकान चलाने के लिए लाइसेंस अनिवार्य है और अवैध बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि स्कूलों, कॉलेजों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों के पास खुले में मांस-मछली की बिक्री पर विशेष नजर रखी जाएगी।
यह कदम फरवरी 2026 में शुरू हुए अभियान का विस्तार है, जिसमें शहरी क्षेत्रों में खुले में बिक्री पर रोक लगाने की शुरुआत की गई थी। मार्च में नगर विकास विभाग ने इसे और सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।
कानूनी प्रावधान क्या कहते हैं
बिहार नगर पालिका अधिनियम, 2007 की धारा 345 के तहत शहरी क्षेत्रों में मांस, मछली या मुर्गी बेचने के लिए नगर निगम या नगर पालिका से लाइसेंस लेना अनिवार्य है।
यदि कोई व्यापारी बिना लाइसेंस के कारोबार करता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसकी दुकान को तत्काल बंद किया जा सकता है। इसके अलावा जुर्माना, सामान जब्त करना और अन्य कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है। सरकार ने सभी शहरी निकायों को निर्देश दिए हैं कि वे नियमित जांच अभियान चलाकर अवैध दुकानों पर कार्रवाई करें और लाइसेंसधारी दुकानों को निर्धारित स्थानों पर शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज करें।
स्वास्थ्य और स्वच्छता का मुद्दा
खुले में मांस-मछली की बिक्री से स्वच्छता संबंधी कई समस्याएं पैदा होती हैं। अस्वच्छ माहौल, कचरे का सही प्रबंधन न होना, मक्खी-मच्छरों का खतरा और संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए सरकार इस पर नियंत्रण चाहती है। इसके अलावा स्कूलों और धार्मिक स्थलों के आसपास ऐसी दुकानों को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
आगे की कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में सभी नगर निकायों में लाइसेंस जांच अभियान और तेज किया जाएगा। बिना लाइसेंस दुकानों को सील किया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। साथ ही, लाइसेंस प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, ताकि व्यापारी आसानी से नियमों का पालन कर सकें।
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि यह कदम लोगों के हित में है और इसका उद्देश्य किसी की खान-पान की आदतों पर रोक लगाना नहीं, बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाना है। सरकार का दावा है कि इससे शहर अधिक स्वच्छ, व्यवस्थित और सुरक्षित बनेंगे।