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दिल्ली बजटः जो शहर चलाते हैं, अब उन्हें भी मिलेगा सुकून, गिग वर्कर्स के लिए नई पहल

गिग वर्कर्स को राहत-रेस्ट स्टॉप, सस्ती कैंटीन और वेलफेयर बोर्ड की पहल।

By श्वेता सिंंह

Mar 24, 2026 17:09 IST

नई दिल्लीः दिल्ली की सड़कों पर दिन-रात दौड़ते डिलीवरी बॉय और राइड शेयरिंग ड्राइवर अब सिर्फ काम ही नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें काम के बीच राहत और सम्मान भी मिलेगा। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए दिल्ली सरकार के 1.03 लाख करोड़ रुपये के बजट में गिग वर्कर्स के लिए पहली बार इतनी स्पष्ट और ठोस पहल देखने को मिली है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए इसे ‘ग्रीन बजट’ बताया और कहा कि इसमें 21 प्रतिशत खर्च पर्यावरणीय सुधारों पर केंद्रित है। लेकिन इस बजट की सबसे अहम झलक उन हजारों गिग वर्कर्स के लिए रही, जो हर दिन शहर की रफ्तार बनाए रखते हैं, लेकिन खुद बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहते हैं।

बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने गिग वर्कर्स की कठिन दिनचर्या का जिक्र करते हुए कहा कि ये कामगार घंटों तक ट्रैफिक में दोपहिया वाहनों पर चलते रहते हैं। उन्हें खाना खाने, मोबाइल चार्ज करने या कुछ देर आराम करने तक की जगह नहीं मिलती। नतीजतन थकान बढ़ती है और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।

देश में तेजी से बढ़ती गिग इकॉनमी ने इस वर्ग को संख्या के लिहाज से मजबूत जरूर किया है, लेकिन उनकी कामकाजी परिस्थितियां अब भी चुनौतीपूर्ण हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक, 2021 में 77 लाख रहे गिग वर्कर्स की संख्या 2025 तक बढ़कर 1.20 करोड़ हो गई है, यानी लगभग 55 प्रतिशत की बढ़ोतरी। दिल्ली में ही हजारों लोग ऐप-बेस्ड सेवाओं के जरिए रोजी-रोटी कमा रहे हैं और शहर की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अटल कैंटीनों के साथ रेस्ट सुविधाएं विकसित करने की घोषणा की है। इन केंद्रों पर गिग वर्कर्स को बैठकर खाना खाने, मोबाइल चार्ज करने और थोड़ी देर आराम करने की सुविधा मिलेगी। यह व्यवस्था खास तौर पर उन लोगों के लिए राहत लेकर आएगी, जिनकी पूरी नौकरी सड़कों पर गुजरती है।

अटल कैंटीन योजना पहले से ही जेजे क्लस्टरों में 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा रही है। अब इसे और विस्तार देने के लिए बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। फिलहाल 45 कैंटीन शुरू हो चुकी हैं और लक्ष्य 100 कैंटीन स्थापित करने का है। इन्हें औद्योगिक इलाकों, झुग्गी बस्तियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में विकसित किया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक सस्ती और पौष्टिक भोजन सुविधा पहुंच सके। सरकार का अनुमान है कि इन कैंटीनों के जरिए रोजाना एक लाख से अधिक प्लेट भोजन परोसा जा सकेगा। इन कैंटीनों से जुड़ी रेस्ट सुविधाएं गिग वर्कर्स को काम के बीच सुरक्षित ठहराव देंगी। इससे न केवल उनकी थकान कम होगी, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आने की उम्मीद है।

सरकार ने गिग वर्कर्स के लिए एक और बड़ा कदम उठाते हुए ‘गिग वेलफेयर बोर्ड’ बनाने की घोषणा की है। यह बोर्ड इस असंगठित वर्ग को संगठित समर्थन देने का काम करेगा। इसके माध्यम से कामगारों को सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, बीमा और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि बजट तैयार करने से पहले गिग वर्कर्स, मजदूरों और किसानों से सुझाव लिए गए थे। इनमें आराम की जगह, मातृत्व लाभ और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग प्रमुख रूप से सामने आई थी, जिन्हें इस बजट में शामिल करने की कोशिश की गई है।

गिग इकॉनॉमी का भविष्य भी काफी बड़ा माना जा रहा है। अनुमान है कि 2030 तक यह क्षेत्र 2.35 लाख करोड़ रुपये का योगदान दे सकता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में करीब 40 प्रतिशत गिग वर्कर्स की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम है। ऐसे में दिल्ली सरकार की यह पहल उनके जीवन स्तर को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। गिग वर्कर्स के अलावा बजट में कई अन्य सामाजिक और विकासात्मक योजनाओं को भी जगह दी गई है। नवजात शिशुओं के लिए मुफ्त डायग्नोस्टिक टेस्ट, 1.3 लाख लड़कियों को मुफ्त साइकिल, मेधावी छात्रों को लैपटॉप, नई सेमीकंडक्टर पॉलिसी और आपदा प्रबंधन के लिए इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर जैसे प्रस्ताव इसमें शामिल हैं।

विभिन्न क्षेत्रों के लिए बजट आवंटन भी सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाता है। शिक्षा के लिए 19,148 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य के लिए 12,645 करोड़ रुपये और शहरी विकास के लिए 7,887 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। कुल बजट का 70.3 प्रतिशत हिस्सा राजस्व व्यय और 29.7 प्रतिशत पूंजीगत व्यय पर खर्च किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह बजट दिल्ली को एक विकसित, हरित और समावेशी शहर बनाने की दिशा में तैयार किया गया है। गिग वर्कर्स के लिए की गई ये पहलें न सिर्फ उनकी मेहनत को सम्मान देंगी, बल्कि शहर की अर्थव्यवस्था को और मजबूती भी प्रदान करेंगी।

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