नई दिल्ली : देश में रसोई गैस LPG के विकल्प के रूप में एथेनॉल के उपयोग की संभावनाओं पर काम शुरू हो गया है। खाद्य एंव सार्वजनिक वितरण विभाग के सचिव संजीव चोपड़ा ने मंगलवार को बताया कि एथेनॉल आधारित कुकिंग सॉल्यूशंस पर शुरुआती स्तर पर प्रयोग किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एथेनॉल से चलने वाले चूल्हों के कुछ प्रारंभिक मॉडल तैयार किए गए हैं लेकिन इन्हें बड़े स्तर पर लागू करने से पहले सुरक्षा और उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी होगा। सरकार इस दिशा में सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स को भी परख रही है ताकि भविष्य में इसे व्यापक रूप से अपनाया जा सके।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति में आई बाधाओं के कारण देश में LPG की उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए एथेनॉल को वैकल्पिक ईंधन के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह योजना अभी शुरुआती चरण में है और इस पर अध्ययन जारी है।
एथेनॉल कार्यक्रम के व्यापक परिप्रेक्ष्य में सरकार का कहना है कि तेल कंपनियों की जरूरतों के अनुरूप उत्पादन क्षमता बढ़ाई गई है। फिलहाल 30% तक ब्लेंडिंग हासिल की जा चुकी है। अब सरकार का फोकस मांग बढ़ाने पर है। जिसमें पेट्रोल के साथ ब्लेंडिंग बढ़ाने, डीजल में उपयोग और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में इसके इस्तेमाल के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
कच्चे माल की उपलब्धता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि एथेनॉल उत्पादन के लिए टूटे चावल (ब्रोकन राइस) की मांग तेल कंपनियों के आवंटन पर निर्भर करती है। यदि कंपनियां अधिक आवंटन देंगी, तो उत्पादन में तेजी लाई जा सकती है।
इसके अलावा सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत चावल की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी पायलट प्रोजेक्ट चला रही है। इस योजना के तहत चावल में टूटे दानों की मात्रा 25% से घटाकर 10% की गई है। इस प्रक्रिया से जो अतिरिक्त टूटे चावल बचेंगे, उनका उपयोग एथेनॉल उत्पादन में किया जा सकता है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह पहल अभी पायलट चरण में है और सभी आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद ही इसे पूरे देश में मूल रूप से लागू किया जाएगा।