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Bengal Election : दीप्शिता धर का चुनावी मुद्दा: 'अभया' के लिए न्याय और महिलाओं की सुरक्षा

दीप्शिता धर का कहना है कि चुनाव ने उन्हें 'अभया' के लिए न्याय मांगने का एक और मौका मुहैया करवाया है।

By Moumita Bhattacharya

Mar 24, 2026 17:31 IST

दमदम उत्तर विधानसभा सीट से चुनाव समर में उतरी CPIM की युवा नेता दीप्शिता धर (Dipsita Dhar) चुनाव में लैंगिक हिंसा झेल रही महिलाओं के मुद्दे को अपना चुनावी मुद्दा बनाने वाली है। उनका कहना है कि वह चुनाव के बेहद भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई हैं क्योंकि वह अब भी आरजी कर अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में दुष्कर्म-हत्या की जूनियर डॉक्टर को न्याय दिलाना चाहती हैं। उनका कहना है कि आरजी कर कांड की पीड़िता 'अभया' की मां का भाजपा के टिकट से चुनावी मैदान में उतरने की इच्छा ने उन्हें काफी निराश किया है।

बता दें, दीप्शिता धर विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हैवीवेट नेता चंद्रीमा भट्टाचार्य के सामने चुनाव लड़ने वाली हैं। उनका कहना है कि चुनाव ने उन्हें 'अभया' के लिए न्याय मांगने का एक और मौका मुहैया करवाया है। धर का विधानसभा केंद्र उत्तर 24 परगना जिले के पानीहाटी विधानसभा केंद्र से सटा हुआ है जहां आज भी 'अभया' के माता-पिता रहते हैं। 'अभया' की मां क्या भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरेंगी? इस बारे में भाजपा ने न तो कोई पुष्टि की है और न ही इन दावों को नकारा है।

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PTI को दिए एक इंटरव्यू में दीप्शिता धर ने कहा कि चुनाव में 'अभया' की मां का भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर करने से 'अभया' के लिए न्याय मांगने की उनके इरादों को नहीं तोड़ता है। दीप्शिता का कहना है कि यह चुनाव मेरे लिए इस मांग को रखने का एक मौका है कि बंगाल की महिलाएं कोई इस्तेमाल कर फेंक देने की कोई वस्तु नहीं है। कोई जब चाहे उनके साथ दुष्कर्म या उनकी हत्या नहीं कर सकता है।

दीप्शिता ने 'अभया' के माता-पिता के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें यह कहा गया था कि वामफ्रंट ने अपने चुनावी फायदे के लिए उनकी बेटी की मौत की घटना को भुनाया है। बकौल दीप्शिता, मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, यह उनका अधिकार है।

पर मैं इतना जरूर कहूंगी कि वामफ्रंट इस परिवार के साथ खड़ा था और सड़कों पर उतरकर पीड़िता के लिए न्याय की मांग की थी। 'अभया' के लिए न्याय मांगना सिर्फ एक परिवार तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह हर उस महिला के लिए जो बंगाल की वर्तमान तृणमूल सरकार में लैंगिग हिंसा की शिकार हो रही है।

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दिल्ली के JNU की छात्रा रही दीप्शिता धर छात्र राजनीति में बेहद सक्रिय रही है। इससे पहले 2021 में दीप्शिता ने बाली से अपना CPIM के टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन वह हार गयी थी। उनका कहना है कि SIR ने लोगों की वास्तविक समस्याओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी और कमजोर नागरिक बुनियादी ढांचों को पीछे ढकेल दिया है।

धर ने SIR को लेकर तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी की भूमिका को 'आंखों में धुल झोंकना' करार दिया। उनका आरोप है कि ममता बनर्जी ने जिस भूमिका को निभाने का वादा किया था, जैसे SIR मेरी लाश पर होगा, यह सब सिर्फ जुमलेबाजी थी। वह चाहती तो प्रशासनिक ठोस कदम कानूनी उपायों के तहत उठा सकती थी लेकिन उन्होंने इसे नजरंदाज किया।

CPIM की इस युवा नेता ने कहा कि लोग TMC से निराश और गुस्से में थे तो उन्हें भाजपा एक बेहतर विकल्प लग रही थी। लेकिन जब उन्होंने देखा कि आरजी कर कांड में CBI ने जो प्रदर्शन किया या पार्थ चटर्जी व अणुव्रत मंडल के भ्रष्टाचार मामलों को जिस तरीके से संभाला गया, उन्हें देखकर भी निराश हो रहे है। मेरा मानना है कि जो मतदाता TMC को सबक सिखाने के लिए भाजपा को वोट देने की सोच रहे थे, अब उन्हें समझ आ गया है कि ऐसा नहीं होने वाला है। इसलिए मुझे लगता है कि अब लोग CPIM को एक बेहतर विकल्प के तौर पर देखेंगे।

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प्रतिद्वंदी के रूप में चंद्रीमा भट्टाचार्य के बारे में दीप्शिता धर का कहना है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि सामने तृणमूल का कौन सा नेता है। इस सीट पर खराब प्रदर्शन की वजह से उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा। 'अभया' मामले को खतरे में डालना, बंगाल में युवाओं की नौकरियों का छिनना, इन सारे सवालों का जवाब देना होगा।

हमारी लड़ाई राजनैतिक है, हमारी व्यक्ति विशेष से कोई लड़ाई नहीं है। प्रतीकुर रहमान के पार्टी बदलने के बारे में पूछने पर धर ने इसे बीती हुई बात बताया। दीप्शिता धर ने उनके पार्टी बदलने को महत्व देने के बजाए उन्हें सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी करार दिया।

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