कोलकाताः स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (Students' Federation of India) यानी SFI के बैनर तले छात्रों का आंदोलन कोलकाता स्थित प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी (Presidency University) में तेज हो गया है। सोमवार रात से कैंपस में धरना दे रहे छात्र अब अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और साफ कह चुके हैं कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी, आंदोलन जारी रहेगा।
मंगलवार को आंदोलनकारियों की ओर से प्रवक्ता उषाश्री मित्रा ने कहा कि यूनिवर्सिटी को अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट कोर्स में दाखिले के लिए खुद का एंट्रेंस एग्जाम आयोजित करना चाहिए। उनका कहना है कि एक स्वायत्त संस्थान होने के नाते प्रेसीडेंसी यूनिवर्सिटी (Presidency University) को अपनी प्रवेश प्रक्रिया खुद तय करनी चाहिए और इसके लिए तुरंत गाइडलाइंस जारी की जानी चाहिए।
फिलहाल, विश्वविद्यालय में दाखिला West Bengal Joint Entrance Examinations Board (WBJEEB) द्वारा आयोजित परीक्षाओं-बैचलर डिग्री एंट्रेंस टेस्ट (PUBDET) और मास्टर डिग्री एंट्रेंस टेस्ट (PUMDET)-के जरिए होता है। SFI से जुड़े छात्रों का तर्क है कि इस व्यवस्था में यूनिवर्सिटी की स्वतंत्रता सीमित हो जाती है।
धरना दे रहे छात्रों की मांग सिर्फ एंट्रेंस एग्जाम तक सीमित नहीं है। उन्होंने इंटरनल कंप्लेंट्स कमेटी (ICC) और स्टूडेंट्स यूनियन के चुनाव जल्द कराने की भी मांग उठाई है। एक प्रदर्शनकारी के अनुसार, कैंपस में लोकतांत्रिक ढांचा मजबूत करने के लिए छात्र प्रतिनिधियों का चुना जाना बेहद जरूरी है।
छात्रों ने मौजूदा स्पोर्ट्स और कल्चरल बोर्ड को भी “अलोकतांत्रिक” बताते हुए खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि बिना चुने हुए छात्र प्रतिनिधियों के किसी भी स्तर पर कमेटी बनाना स्वीकार्य नहीं है।
इसके अलावा, आंदोलनकारियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के लागू होने को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने कोर्स स्ट्रक्चर और ब्रिज कोर्स से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टता की मांग की है, ताकि छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति न बने।
एसएफआई (SFI) की यूनिट ने चार-सूत्रीय मांगों का एक चार्टर पेश किया है और साफ कर दिया है कि जब तक इन मांगों को स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा। फिलहाल यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे स्थिति और अधिक पेचीदा बनी हुई है।