कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाने के लिए राज्य सरकार ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नबान्न से मुख्य सचिव दुष्यंत नरियाला ने सभी विभागों, अधिकारियों और कर्मचारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
चुनाव आयोग पहले ही ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की घोषणा कर चुका है, और अब राज्य सरकार ने भी इसे सख्ती से लागू करने का फैसला लिया है। इस बार चुनाव दो चरणों में आयोजित होंगे-23 अप्रैल को 152 सीटों पर और 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान होगा, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी। राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 6.45 करोड़ है।
हिंसा और डर से मुक्त मतदान पर जोर
निर्देशों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर मतदाता बिना किसी भय के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान राज्य में कुछ हिंसक घटनाएं सामने आई थीं, जिनमें बूथों पर झड़प और एक ईवीएम को तालाब में फेंकने की घटना भी शामिल थी। हालांकि, बूथ कैप्चरिंग की 875 शिकायतों को चुनाव आयोग ने आधारहीन बताया था।
इस बार प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी प्रकार की हिंसा, धमकी या अशांति पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
छह प्रमुख बिंदुओं पर सख्ती
राज्य सरकार के नोटिफिकेशन में छह अहम बिंदुओं को प्राथमिकता दी गई है:
-चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा पर पूर्ण रोक।
-मतदाताओं और चुनाव कर्मियों को डराने-धमकाने पर कड़ी कार्रवाई।
-पैसे, उपहार या अन्य प्रलोभन देकर वोट प्रभावित करने पर सख्त प्रतिबंध।
-फर्जी मतदान (छप्पा वोटिंग) रोकने के लिए कड़े सत्यापन उपाय।
-बूथ कैप्चरिंग और अवैध जमावड़े पर पूर्ण रोक।
-मतदाताओं की आवाजाही में बाधा डालने की किसी भी कोशिश पर कानूनी कार्रवाई।
आचार संहिता और प्रशासनिक जवाबदेही
सभी सरकारी कर्मचारियों को आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। यह गाइडलाइन राज्य के हर स्तर-विभागों, नगर निकायों और पंचायतों तक लागू होगी।
मुख्य सचिव ने निर्देशों के अनुपालन की निगरानी के लिए समयसीमा भी तय की है। सभी विभागों को 25 मार्च 2026 शाम 5:30 बजे तक नोटिफिकेशन प्राप्ति की पुष्टि रिपोर्ट भेजनी होगी।
क्यों अहम हैं ये निर्देश?
पिछले चुनावों में राज्य की छवि कई बार हिंसा और गड़बड़ी से प्रभावित रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने हाल ही में प्रशासनिक स्तर पर बदलाव भी किए थे।
अब इन नए निर्देशों के जरिए सरकार और चुनाव आयोग दोनों यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि चुनाव पूरी पारदर्शिता और शांति के साथ संपन्न हों। इससे न केवल मतदाताओं का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि मतदान प्रतिशत में भी वृद्धि की उम्मीद है।
अंत में प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि वे बिना किसी डर के मतदान केंद्र पहुंचें और लोकतंत्र को मजबूत बनाने में अपनी भागीदारी निभाएं।