ढाका : वैश्विक स्तर पर चल रहे ईंधन संकट का सीधा असर बांग्लादेश के चटगांव बंदरगाह पर दिखाई दे रहा है। पर्याप्त डीजल न मिलने के कारण बंदरगाह पर खड़े बड़े जहाजों (मदर वेसल) से माल उतारने और उसे आगे गंतव्य तक पहुंचाने का काम संचालित हो रहा है।
इसका सबसे अधिक असर कोयला आधारित बिजलीघरों पर पड़ा है। ईंधन की कमी के कारण कोयले का परिवहन बाधित हो गया है, जिससे देश के कई बिजली संयंत्रों के बंद होने की स्थिति बन गई है।
इस परिस्थिति में भारत ने एक बार फिर बांग्लादेश की मदद के लिए कदम बढ़ाया है। असम स्थित नुमालिगढ़ रिफाइनरी से पाइपलाइन के माध्यम से दूसरी खेप के रूप में अतिरिक्त 5,000 टन डीजल बांग्लादेश भेजा जा रहा है। आज शुक्रवार को इस ईंधन के दिनाजपुर के पार्वतीपुर रेलहेड डिपो पर पहुंचने की उम्मीद है। इससे पहले 13 मार्च को भी भारत ने पहली खेप में 5,000 टन डीजल भेजा था।
पार्वतीपुर डिपो के सूत्रों के अनुसार पिछले बुधवार शाम से ही नुमालिगढ़ रिफाइनरी से पाइपलाइन के जरिए डीजल पंप करना शुरू कर दिया गया था। अनुमान है कि यह ईंधन लगभग 60 घंटे के भीतर डिपो के भंडारण केंद्र तक पहुंच जाएगा।
डिपो के प्रबंधक अहसान हबीब ने बताया कि रिफाइनरी से नियमित रूप से डीजल की आपूर्ति जारी है और यह तय समय के भीतर पहुंच जाएगी।
चटगांव बंदरगाह के सूत्रों के मुताबिक इस समय बंदरगाह के आउटर एंकर क्षेत्र में 70 से अधिक बड़े जहाज माल उतारने के इंतजार में खड़े हैं। इन जहाजों से माल निकालकर देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाने के लिए रोजाना लगभग 1,100 लाइटर जहाज काम करते हैं।
आमतौर पर प्रतिदिन 90 से 100 जहाजों से माल उतारा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को सुचारू रखने के लिए रोजाना करीब ढाई से तीन लाख लीटर डीजल की जरूरत होती है, लेकिन फिलहाल केवल 40 से 50 हजार लीटर ही उपलब्ध हो पा रहा है।
वर्तमान में देश के छह चालू कोयला आधारित बिजलीघरों में से मातारबाड़ी को छोड़कर बाकी सभी संयंत्रों में लाइटर जहाजों के जरिए कोयले की आपूर्ति की जाती है। हर महीने लगभग साढ़े आठ लाख टन कोयला ढोने के लिए 400 से 420 लाइटर जहाजों की आवश्यकता होती है।
हालांकि ईंधन संकट की वजह से यह आपूर्ति व्यवस्था टूटने की कगार पर पहुंच गई है। डीलरों के पास पर्याप्त तेल न होने के कारण कई जहाज निष्क्रिय पड़े हैं।