नई दिल्ली : देश में एलपीजी की कमी और ईंधन आपूर्ति की अनिश्चितता के बीच, बिजली पर आधारित रसोई उपकरणों की ओर रुझान बढ़ रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में Energy Efficiency Services Limited बड़े कदम उठाने जा रही है।
संस्था ने बताया है कि बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए वह चरणबद्ध तरीके से कुल 5 लाख इंडक्शन कुकटॉप खरीदने के लिए नया टेंडर जारी करने की योजना बना रही है। सूत्रों के अनुसार पहले ही 1 लाख इंडक्शन कुकटॉप के लिए टेंडर जारी किया जा चुका है।
इसके अलावा उपयोगकर्ताओं की प्रारंभिक प्रतिक्रिया के आधार पर इंडक्शन के लिए उपयुक्त बर्तन खरीदने के लिए भी अलग टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी की तुलना में इंडक्शन का उपयोग करने पर खाना बनाने की लागत लगभग 35 प्रतिशत कम हो जाती है। उल्लेखनीय है कि 2023 में ईईएसएल ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक कुकिंग प्रोग्राम की शुरुआत की थी।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम लोगों के रसोई खर्च को कम करना और वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है। खासतौर पर शहर और शहरी इलाकों में इंडक्शन कुकटॉप का उपयोग पहले ही बढ़ चुका है। अब कई परिवार एलपीजी के साथ-साथ इंडक्शन का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य भी इस बदलाव का बड़ा कारण है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और होर्मुज जलसंधि के आसपास की अनिश्चितताओं के कारण विश्व स्तर पर ईंधन की आपूर्ति पर दबाव है। जिसका असर भारत में भी देखा जा रहा है।
इससे एलपीजी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति की चिंता बढ़ गई है। इस परिस्थिति में बिजली पर आधारित रसोई उपकरण कई लोगों के लिए वैकल्पिक विकल्प बन रहे हैं और सरकार भी धीरे-धीरे इस दिशा में जोर दे रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार अगर बिजली की कीमत स्थिर रहती है, तो भविष्य में और अधिक परिवार इंडक्शन कुकिंग की ओर रुख कर सकते हैं। इससे न केवल खाना बनाने का खर्च कम होगा, बल्कि ईंधन पर निर्भरता से भी लोगों को राहत मिलेगी।