मुंबई : पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्धविराम को लेकर बयानबाजी तो जारी है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात सामान्य होने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे। दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के सामने रखी जा रही शर्तें ऐसी हैं, जिन्हें स्वीकार करना किसी के लिए भी आसान नहीं दिखता। ऐसे में संघर्ष थमने की उम्मीद अभी दूर ही लग रही है।
इस संघर्ष को अब एक महीना पूरा होने जा रहा है। बीते कुछ हफ्तों से ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते मालवाहक जहाजों की आवाजाही लगभग रोक दी है। इसका असर वैश्विक बाजार में साफ दिखाई दे रहा है। जहां तेल और गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और निकट भविष्य में राहत के संकेत भी नहीं मिल रहे।
हालांकि एक और गंभीर प्रभाव सामने आ रहा है, जिस पर अभी ज्यादा ध्यान नहीं गया है। इस युद्ध का असर वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर की बुनियादी संरचना पर पड़ रहा है। खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की वजह से कामकाज कई रूप में बाधित हुआ है।
डेटा सेंटर्स के संचालन के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा और ईंधन की जरूरत होती है लेकिन बढ़ती कीमतों और सीमित आपूर्ति के कारण कंपनियों को अपने संचालन में कटौती करनी पड़ रही है। इससे कंप्यूटिंग लागत बढ़ गई है और कई जगहों पर काम धीमा या बंद करना पड़ा है।
इसके अलावा सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए जरूरी कच्चे माल जैसे हीलियम, एल्युमिनियम और ब्रोमीन की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। पश्चिम एशिया इन संसाधनों का एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा है लेकिन मौजूदा हालात के कारण सप्लाई चेन पर गहरा असर पड़ा है। कंपनियों को आने वाले महीनों के लिए अपने उत्पादन की रणनीति दोबारा बनानी पड़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो जीपीयू और चिप निर्माण में बड़ी बाधाएं आ सकती हैं। जिससे लागत बढ़ेगी और उत्पादन प्रभावित होगा। इसका सीधा असर वैश्विक स्तर पर एआई तकनीक की प्रगति पर पड़ सकता है।
इसके साथ ही इस क्षेत्र में होने वाले निवेश पर भी असर दिखने लगा है। अनिश्चितता की वजह से बड़े निवेशक अपनी योजनाओं को टाल रहे हैं। जिससे एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। जानकारों के मुताबिक एआई तकनीक आज वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास में अहम भूमिका निभा रही है, ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह की रुकावट का व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ना तय है।