नयी दिल्लीः केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि भारत ने विश्व व्यापार संगठन की 14वीं मंत्रीस्तरीय बैठक (MC14) में निवेश सुविधा समझौते (IFD) को लेकर अपना स्पष्ट रुख अपनाया और इसे संगठन के ढांचे में शामिल करने का समर्थन नहीं किया।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय संगठन के मूल सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उनके अनुसार, इस तरह के समझौते को शामिल करने से WTO की कार्यप्रणाली और उसके बुनियादी ढांचे पर असर पड़ सकता है।
मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि भारत ने इस मुद्दे पर स्वतंत्र और दृढ़ रुख अपनाया तथा सुधार प्रक्रिया के तहत व्यापक और सकारात्मक चर्चा के लिए अपनी तत्परता दिखाई। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों के बीच इस तरह के बहुपक्षीय समझौतों के लिए कानूनी सुरक्षा उपायों और सीमाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
मत्स्य पालन से जुड़े सत्र में बोलते हुए गोयल ने भारत के जन-केंद्रित दृष्टिकोण को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश में करोड़ों लोगों की आजीविका मत्स्य क्षेत्र पर निर्भर है, जिनमें अधिकतर छोटे और पारंपरिक मछुआरे शामिल हैं, जो टिकाऊ तरीके अपनाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि समुद्री संसाधनों के संरक्षण के लिए भारत लंबे समय से कदम उठाता रहा है, जैसे कि हर साल लागू होने वाला मछली पकड़ने पर प्रतिबंध। अत्यधिक मछली पकड़ने की समस्या मुख्य रूप से बड़े औद्योगिक जहाजों और भारी सब्सिडी वाले बेड़ों से जुड़ी है, न कि विकासशील देशों के छोटे मछुआरों से।
उन्होंने संतुलित और विकासोन्मुखी समाधान की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे फैसले होने चाहिए जो समुद्री संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ लोगों की आजीविका की भी रक्षा करें।
अपने दौरे के दौरान उन्होंने कैमरून में भारतीय समुदाय से भी संवाद किया और कहा कि प्रवासी भारतीय दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।