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भारतीय भाषा परिषद द्वारा महादेवी वर्मा की जयंती का भव्य साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजन

इस अवसर पर महादेवी वर्मा पर बनी फिल्म ‘पंथ रहने दो अपरिचित’ की प्रदर्शनी भी हुई।

By रजनीश प्रसाद

Mar 29, 2026 15:26 IST

कोलकाता : कोलकाता की प्रसिद्ध संस्था भारतीय भाषा परिषद ने महादेवी वर्मा की जयंती पर “महादेवी वर्मा और स्त्री विमर्श” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए परिषद के निदेशक डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि भक्तिकाल में अक्सर मीरा को हाशिए पर रखा जाता है। छायावाद में महादेवी वर्मा को हाशिए पर रखा जाता है। उन्होंने बताया कि स्त्रियों के दो बड़े आभूषण हैं - मौन और आँसू। महादेवी का लेखन स्त्री विवशता को चुनौती देता है। उनके लेखन में बाजार के रंगीन प्रलोभनों के खिलाफ विरोध का स्वर है। महादेवी वर्मा में स्वानुभव और संवेदना दोनों हैं।

विश्वभारती विश्वविद्यालय, शांतिनिकेतन की डॉ. श्रुति कुमुद ने कहा कि महादेवी वर्मा अपनी सीमा को अपनी शक्ति में बदल लेती हैं। उन्होंने बताया कि आज स्त्री विमर्श को गाली की तरह देखा जा रहा है। कैंसिल कल्चर स्त्रियों के खिलाफ ट्रोलिंग के लिए इस्तेमाल हो रहा है।

हिंदी विभाग, विद्यासागर विश्वविद्यालय की शोधार्थी सुषमा कुमारी ने कहा कि महादेवी वर्मा ने अपने समय की सामाजिक रूढ़ियों, अन्याय और अत्याचारों का विरोध किया। शोधार्थी रूपेश कुमार यादव ने कहा कि उनका रचना संसार पुरुष वर्चस्व के खिलाफ सशक्त प्रतिरोध है।

इस अवसर पर महादेवी वर्मा पर बनी फिल्म ‘पंथ रहने दो अपरिचित’ की प्रदर्शनी भी हुई।

कार्यक्रम में घनश्याम सुगला, प्रो. हितेन्द्र पटेल, डॉ. नंदिता बनर्जी, प्रो. दिलीप शाह, श्री आशीष झुनझुनवाला, विमला पोद्दार, डॉ. सुशीला ओझा, ज्योति शोभा, डॉ. शिप्रा मिश्रा, ऋतेश पांडेय, हिंदी अधिकारी राजेश साव, अल्पना नायक, राकेश सिंह, मंटू दास, डॉ. श्रद्धांजलि सिंह, डॉ. संजय राय, संजय दास, डॉ. अनीता राय, जीतेंद्र जीतांशु, डॉ. आदित्य सिंह, डॉ. रमाशंकर सिंह, सेराज खान बातिश, फरहान अजीज, एन चंद्र राव, चन्दना मंडल, प्रमोद महतो, सूर्य देव रॉय, शुभोस्वप्ना मुखर्जी, कंचन भगत और शिखा सिंह सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय जायसवाल ने किया। उन्होंने कहा कि महादेवी वर्मा का साहित्य आधी आबादी की कहानी है। उन्होंने मनमाना और मनचाहा स्वतंत्र रूप से चुना।

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