नयी दिल्लीः लोकसभा में वामपंथी उग्रवाद पर हुई चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार की लगातार कार्रवाई और विकास योजनाओं के चलते बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद लगभग खत्म हो चुका है और अब यह इलाका तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में कभी वामपंथी उग्रवाद का असर था, वहां अब बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया गया है। बस्तर के हर गांव में स्कूल खोलने का अभियान चलाया गया। राशन दुकानों की स्थापना की गई। प्रत्येक तहसील और पंचायत स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) स्थापित किए गए। लोगों को आधार और राशन कार्ड उपलब्ध कराए गए, जिससे उन्हें नियमित रूप से खाद्यान्न मिल रहा है।
गृह मंत्री ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद आदिवासी समुदायों को विकास से क्यों वंचित रखा गया। उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे क्षेत्रों में विकास इसलिए नहीं पहुंच पाया क्योंकि वहां लंबे समय तक “लाल आतंक” का प्रभाव बना रहा। हिंसा का कोई औचित्य नहीं हो सकता और किसी भी मांग को संवैधानिक तरीके से ही उठाया जाना चाहिए।
नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्तमान सरकार के कार्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब इन क्षेत्रों में वास्तविक बदलाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले के वर्षों में न तो पर्याप्त स्कूल बने, न ही स्वच्छ पानी और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, बल्कि संचार और बैंकिंग सेवाएं भी इन इलाकों तक नहीं पहुंच पाईं। नक्सलवाद की समस्या केवल विकास से जुड़ी नहीं है, बल्कि यह एक विचारधारा से भी संबंधित है। इसी विचारधारा के कारण देश के कई राज्यों जैसे छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल, कर्नाटक के कुछ हिस्से और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में “रेड कॉरिडोर” बन गया था, जहां कानून व्यवस्था कमजोर पड़ गई थी। इस समस्या के कारण करीब 12 करोड़ लोग लंबे समय तक गरीबी में रहे और हजारों युवाओं की जान चली गई या वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
सरकार का लक्ष्य है कि देश से नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त किया जाए, और इसके लिए तय समयसीमा के तहत अभियान जारी है।