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WTO बैठक में भारत का बड़ा प्रस्ताव: विकासशील देशों के लिए आधुनिक तकनीक हस्तांतरण व कृषि मुद्दों पर नई रणनीति की मांग

ई-कॉमर्स ड्यूटी पर नहीं बन सकी सहमति, डिजिटल असमानता भी बना मुद्दा

By डॉ. अभिज्ञात

Mar 31, 2026 19:57 IST

नई दिल्ली: भारत ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के मंच पर विकासशील और कम विकसित देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक तकनीक के आदान-प्रदान पर चर्चा शुरू करने की आवश्यकता पर बल दिया है। साथ ही कृषि क्षेत्र से जुड़े लंबे समय से लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए नए तरीकों पर बातचीत आगे बढ़ाने की बात कही है।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार भारत ने इस बात पर जोर दिया कि उन्नत तकनीक का साझा उपयोग वैश्विक व्यापार में भागीदारी बढ़ाने में मदद करेगा, खासकर उन देशों के लिए जो अभी विकास के दौर में हैं। इससे उनकी उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा क्षमता मजबूत हो सकती है।

हाल ही में कैमरून की राजधानी याउंडे में आयोजित डब्ल्यूटीओ की मंत्रीस्तरीय बैठक के दौरान भारत ने डिजिटल असमानता, डिजिटल ढांचे के विकास और कौशल सुधार जैसे मुद्दों पर भी सक्रिय भूमिका निभाई। भारत का मानना है कि इन क्षेत्रों में प्रगति से विकासशील देशों को वैश्विक व्यापार में बेहतर अवसर मिल सकते हैं।

ई-कॉमर्स पर कस्टम ड्यूटी न लगाने से जुड़े पुराने प्रावधान को आगे बढ़ाने के मुद्दे पर सदस्य देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी। अब इस विषय पर आगे का फैसला जिनेवा में होने वाली अगली बैठक में लिया जाएगा।

कृषि क्षेत्र को लेकर भारत ने कहा कि बातचीत में रुकावट का मुख्य कारण भरोसे की कमी है, जिसे दूर करने के लिए पहले किए गए वादों को लागू करना जरूरी है। भारत ने सार्वजनिक भंडारण और विशेष सुरक्षा उपाय जैसे अहम मुद्दों को प्राथमिकता देने की मांग की।

भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि विकासशील देशों को मिलने वाले विशेष और अलग व्यवहार के प्रावधानों को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।

इसके अलावा चीन की अगुवाई वाले निवेश सुविधा समझौते को लेकर भारत ने आपत्ति जताई और कहा कि इससे डब्ल्यूटीओ के मूल सिद्धांतों पर असर पड़ सकता है। वहीं, अमेरिका ने ई-कॉमर्स पर कस्टम ड्यूटी छूट को लेकर सहमति न बनने पर निराशा जताई और संकेत दिया कि वह इस मुद्दे पर अन्य देशों के साथ अलग से पहल कर सकता है।

भारत चाहता है कि गरीब और विकासशील देशों को नई तकनीक और व्यापार के बेहतर मौके मिलें। साथ ही, कृषि और डिजिटल व्यापार से जुड़े नियमों को इस तरह बनाया जाए कि सभी देशों को समान लाभ मिल सके।

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