यरुशलम: इजरायल में हाल ही में पारित एक नए कानून को लेकर फिलिस्तीनी क्षेत्रों में तनाव और विरोध तेज हो गया है। इस कानून में उन फिलिस्तीनियों के लिए फांसी की सजा का प्रावधान किया गया है, जिन्हें इजरायली नागरिकों की हत्या का दोषी ठहराया जाता है।
क्या है नया कानून?
इजरायल की संसद कनेस्सेट ने इस विधेयक को मंजूरी दी है। इसके तहत वेस्ट बैंक में चलने वाली सैन्य अदालतों को निर्देश दिया गया है कि ऐसे मामलों में मौत की सजा को सामान्य दंड के रूप में माना जाए, हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट दी जा सकती है।
क्यों हो रहा है विरोध?
इस फैसले के बाद वेस्ट बैंक के कई शहरों में प्रदर्शन शुरू हो गए। लोगों का कहना है कि यह कानून बेहद कठोर है और इससे जेलों में बंद फिलिस्तीनियों के भविष्य को लेकर डर बढ़ गया है। नाब्लुस जैसे शहरों में लोगों ने रैलियां निकालीं और नारेबाजी करते हुए इस कानून को वापस लेने की मांग की।
सरकार का पक्ष
इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने इस कानून का समर्थन करते हुए इसे देश की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया। उनके अनुसार, यह फैसला लंबे समय से लंबित था।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल सहित कई संस्थाओं ने इस कानून पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे जीवन के अधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हो सकता है।
आगे क्या?
यह कानून करीब 30 दिनों में लागू हो सकता है, हालांकि इसे अदालत में चुनौती दी जा सकती है। फिलहाल, इस मुद्दे ने इजरायल और फिलिस्तीन के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है।
सरल शब्दों में समझें
इजरायल ने एक नया कानून बनाया है, जिसमें कुछ मामलों में फिलिस्तीनियों को फांसी की सजा दी जा सकती है। इससे वहां के लोगों में डर और नाराजगी बढ़ गई है, इसलिए जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।