वाशिंगटनः अमेरिका में ‘नो किंग्स’ नाम से आयोजित विरोध प्रदर्शनों ने देशभर में जोर पकड़ा, जहां अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं वाले राज्यों के लोग सड़कों पर उतर आए। इन प्रदर्शनों का उद्देश्य राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाना था।
न्यूयॉर्क में टाइम्स स्क्वायर के आसपास बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर और बैनर हाथों में लेकर नारे लगाए और शहर की सड़कों पर मार्च किया। देश के अन्य हिस्सों जैसे लॉस एंजेलिस, न्यूयॉर्क, छोटे कस्बों और उपनगरों में भी इसी तरह के आयोजन देखने को मिले।
दिनभर चले इन प्रदर्शनों में लोगों ने सिर्फ मार्च ही नहीं किया, बल्कि गीत, नृत्य और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के जरिए भी अपनी बात रखी। मिनेसोटा में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में मशहूर रॉक कलाकार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने प्रस्तुति दी। उन्होंने राज्य को पूरे देश के लिए प्रेरणा बताया। इस दौरान उन्होंने जनवरी में संघीय इमिग्रेशन कार्रवाई के दौरान मारे गए एलेक्स प्रेटी और रेनी गुड को श्रद्धांजलि भी दी।
इन घटनाओं के बाद इमिग्रेशन नीति और सरकारी कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई, और ये मामले सार्वजनिक चर्चा के केंद्र बन गए। सैन फ्रांसिस्को में भी बड़ी संख्या में लोग एम्बरकेडेरो प्लाजा में जुटे और सिविक सेंटर प्लाजा तक मार्च निकाला। यहां अमेरिकी झंडों के साथ-साथ यूक्रेन के समर्थन और ट्रांसजेंडर अधिकारों से जुड़े बैनर भी दिखाई दिए। वहीं फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच में कुछ स्थानों पर तनाव भी देखने को मिला, जहां करीब 50 ट्रंप समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस हुई। हालांकि, व्यापक स्तर पर ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और इनमें बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी देखने को मिली।