शिमला: हिमाचल प्रदेश में एंट्री टैक्स बढ़ाए जाने के मुद्दे पर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बजट सत्र के दौरान विपक्षी दल बीजेपी ने विधानसभा परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन कर सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की।
विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने सरकार पर जल्दबाजी में फैसले लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस निर्णय से राज्य की सीमाओं पर तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। उनका कहना है कि पंजाब और हरियाणा से जुड़े इलाकों में विरोध बढ़ रहा है और ट्रांसपोर्टर भी नाराजगी जता रहे हैं।
उन्होंने बताया कि एंट्री टैक्स में बढ़ोतरी का असर खासतौर पर सीमावर्ती जिलों-ऊना, नाहन, नालागढ़, कांगड़ा और बिलासपुर में देखने को मिल रहा है, जहां लोगों को रोजमर्रा के कामों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जयराम ठाकुर ने सरकार के इस दावे को भी खारिज किया कि टैक्स में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। उनके मुताबिक छोटे वाहनों पर शुल्क 40 रुपये से बढ़ाकर 170 रुपये कर दिया गया है, जबकि बड़े वाहनों के लिए यह राशि 1000 रुपये तक पहुंच गई है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पड़ोसी राज्यों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हिमाचल के वाहनों पर टैक्स बढ़ा दिया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने हिमाचल के वाहनों के प्रवेश को रोकने की चेतावनी दी है, जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
ठाकुर ने पेट्रोल और डीजल पर प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क लगाने के विचार की भी आलोचना की और सरकार से इसे दोबारा सोचने की अपील की। हालांकि, उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा ‘प्राइड ऑफ हिल्स’ योजना के तहत दी गई लगभग 3,920 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताया और इसे राज्य के लिए बड़ी राहत बताया।