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Bengal Election: बंगाल में चुनावी प्रशिक्षण केंद्र पर बवाल: BDO निलंबित, EC सख्त

नदिया जिले में प्रशिक्षण के दौरान हिंसा, आचार संहिता उल्लंघन के आरोप; शिक्षक घायल।

By श्वेता सिंह

Apr 01, 2026 09:44 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में चुनावी प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान हुई हिंसा को लेकर चुनाव आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने हंसखाली ब्लॉक के ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) सायंतन भट्टाचार्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है।

यह घटना 27 मार्च को हंसखाली ब्लॉक के एक स्कूल में आयोजित प्रेसीडिंग और पोलिंग अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान हुई थी, जिसमें एक शिक्षक गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

क्या है पूरा मामला ?

घटना के दौरान शिक्षक सैकत चट्टोपाध्याय ने कथित तौर पर एक सरकारी विज्ञापन के प्रदर्शन पर आपत्ति जताई थी। बताया गया कि प्रशिक्षण शुरू होने से पहले प्रोजेक्टर पर एक सरकारी विज्ञापन दिखाया जा रहा था, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की तस्वीर शामिल थी।

कुछ प्रशिक्षण प्रतिभागियों का मानना था कि चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू होने के बावजूद इस तरह का प्रदर्शन नियमों का उल्लंघन है। आरोप है कि इसी आपत्ति के बाद शिक्षक के साथ मारपीट की गई, जिसमें उन्हें सिर पर चोट आई।

FIR दर्ज, जांच जारी

इस घटना को लेकर रानाघाट थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटना के सभी पहलुओं को खंगालने की कोशिश की जा रही है।

चुनाव आयोग की सख्ती

चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने राज्य प्रशासन को भेजे अपने आदेश में कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रभारी अधिकारी के रूप में BDO सायंतन भट्टाचार्य अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में विफल रहे।

आयोग के अनुसार,“अधिकारी की लापरवाही के कारण हुई यह घटना स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के प्रयासों पर दाग लगाती है।” आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि संबंधित अधिकारी को तुरंत निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जाए। चुनाव आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इन आदेशों को तत्काल लागू करे और 1 अप्रैल सुबह 11 बजे तक अनुपालन रिपोर्ट सौंपे।

चुनावी माहौल पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान इस तरह की घटनाएं न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं, बल्कि निष्पक्ष चुनाव की धारणा को भी प्रभावित करती हैं।

ऐसे में आयोग की यह कार्रवाई चुनावी माहौल को नियंत्रित और पारदर्शी बनाए रखने की दिशा में एक सख्त संदेश मानी जा रही है। नदिया की यह घटना चुनावी तैयारियों के बीच अनुशासन और नियमों के पालन की अहमियत को रेखांकित करती है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या सामने आता है और आगे क्या कार्रवाई की जाती है।

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