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600 करोड़ रुपये की साइबर ठगी! जेसप-डनलप के पूर्व मालिक पवन रुइया गिरफ्तार

148 फर्जी कंपनियां बनाकर क्रिप्टोकरेंसी के जरिए करोड़ों रुपये हड़पने का आरोप। कोलकाता हाईकोर्ट से राहत हटते ही कार्रवाई।

By श्वेता सिंह

Apr 01, 2026 00:06 IST

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सामने आए बड़े साइबर ठगी मामले में राज्य पुलिस ने उद्योगपति पवन रुइया (Pawan Ruia) को गिरफ्तार कर लिया है। पश्चिम बंगाल पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने उन्हें मंगलवार को न्यू टाउन के एक होटल के बाहर से हिरासत में लिया।

डनलप (Dunlop India) और जेसप (Jessop & Company) के पूर्व मालिक पवन रुइया पर करीब 600 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का आरोप है।

कैसे हुआ खुलासा?

यह मामला साल 2024 में सामने आया, जब इको पार्क थाने में एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई। उसने बताया कि ‘ज्यादा मुनाफा’ का लालच देकर उससे एक मोबाइल ऐप ‘केकेआरएमएफ.apk’ डाउनलोड कराया गया और करीब 93 लाख रुपये की ठगी कर ली गई।

इस शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और धीरे-धीरे एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा हुआ।

148 फर्जी कंपनियों का जाल

जांच में पता चला कि ठगी से जुटाई गई रकम को कई फर्जी कंपनियों के खातों में भेजा जाता था। ये कंपनियां कोलकाता के 46, सैयद अमीर अली एवेन्यू स्थित ‘रुइया सेंटर’ से संचालित हो रही थीं।

पुलिस ने अब तक ऐसी 148 फर्जी कंपनियों का पता लगाया है, जिनके जरिए करोड़ों रुपये का लेनदेन किया गया।

डिजिटल मुद्रा के जरिए पैसे की हेराफेरी

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस ठगी की रकम को छिपाने और विदेश भेजने के लिए उसे क्रिप्टोकरेंसी (डिजिटल मुद्रा) में बदल दिया जाता था। इस मामले में पहले भी 1 नवंबर 2025 को दिल्ली हवाई अड्डे से इस गिरोह के एक प्रमुख सदस्य राहुल वर्मा को गिरफ्तार किया गया था।

इस केस में पवन रुइया के अलावा उनके बेटे राघव और बेटी पल्लवी भी आरोपी हैं।

देशभर में फैला नेटवर्क

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (National Cyber Crime Reporting Portal) के अनुसार, इस गिरोह से जुड़े देशभर में 1,379 साइबर ठगी के मामले सामने आए हैं। ऐसे मामले में 1,900 से ज्यादा लोग इसके शिकार हो चुके हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है और इसकी जड़ें काफी गहरी हैं।

अदालत से राहत खत्म, फिर गिरफ्तारी

इस मामले में 31 दिसंबर 2025 को कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) ने पवन रुइया को राहत दी थी, लेकिन मंगलवार को अदालत ने यह सुरक्षा हटा ली। इसके कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

600 करोड़ रुपये की इस साइबर ठगी ने एक बार फिर दिखाया है कि डिजिटल माध्यम से बड़े स्तर पर धोखाधड़ी कैसे की जा रही है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले समय में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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