SIR के काम में शामिल 5 न्यायिक अधिकारियों को मालदह के मोथाबाड़ी में रोक कर रखने की घटना से हड़कंप मच गया है। एक महिला न्यायिक अधिकारी का वीडियो तेजी से वायरल हुआ है जिसमें उन्होंने अपने जिंदा वापस लौटने को लेकर ही आशंका जतायी है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने भी आज (2 अप्रैल) को कहा है कि वह रात को 1 बजे तक जागकर घटना पर नजर रख रहे थे। ऐसी स्थिति में सवाल उठ रहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर न्यायिक अधिकारियों को SIR का काम करने में जहां खतरा महसूस हो रहा है, वहां आम जनता को कितनी सुरक्षा मिलती होगी?
प्राप्त जानकारी के अनुसार के अनुसार इस घटना में अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है जिसमें से एक पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए ISF का प्रत्याशी भी है। अब तक इस घटना में 4 मामले दायर किए जा चुके हैं। इनमें से कई गैरजमानती वारंट भी हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी घटना घटी कैसे? क्यों न्यायिक अधिकारियों को सुरक्षा मुहैया नहीं करवायी गयी?
इस मामले में मालदह के अतिरिक्त पुलिस सुपर मकसुद हसन ने मीडिया को दिए बयान में कहा है कि 4 शिकायतें दर्ज हुई हैं और मामले की जांच भी चल रही है। मिली जानकारी के अनुसार न्यायिक अधिकारियों को जो व्यक्तिगत सुरक्षाकर्मी मुहैया करवाए गए हैं, वे सभी मुख्य तौर पर कॉन्सटेबल पद के कर्मचारी हैं।
अधिकांश न्यायिक अधिकारी SDO अथवा BDO ऑफिस में बैठकर दस्तावेजों की जांच करते हैं। अधिकांश जिला पुलिस के अधिकारियों का दावा है कि इन जगहों के कम से कम आधी क्षेत्र की जिम्मेदारी केंद्रीय बल के जवान अभी संभाले हैं। रास्ते में इन्हें सुरक्षा प्रदान करते हुए केंद्रीय बल का काफिला चलता है जिसमें 4 CRPF जवान और एक पुलिसकर्मी रहता है।
ऐसी स्थिति में न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा में चुक कहां हुई?
कुछ पुलिस अधिकारियों का मानना है कि उत्तेजित जनता को समझाने में काफी समय बर्बाद हो गया था। अगर केंद्रीय बल का इस्तेमाल किया जाता तो मामला और बिगड़ सकता था। इसके बावजूद जिला पुलिस ने क्यों आवश्यक कदम उठाने में देर की? यह सवाल अभी भी घूम रहा है।
बता दें, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर SIR से संबंधित दस्तावेजों की जांच न्यायिक अधिकारी कर रहे हैं। वे विचाराधीन मामलों का निपटारा कर रहे हैं। इन न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की है, जो वर्तमान में चुनाव आयोग के अधीनस्थ हैं।
मोथाबाड़ी में आखिर क्या हुआ था?
बुधवार की शाम को मोथाबाड़ी विधानसभा केंद्र के अंतर्गत कालियाचक 2 बीडीओ ऑफिस 3 महिला समेत कुल 7 न्यायिक अधिकारियों को रोक कर रखने का आरोप है। बताया जाता है कि बीडीओ ऑफिस के दोनों गेट को बंद कर देर रात तक विरोध-प्रदर्शन किया गया। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ न्यायाधीश गाड़ियों से मालदह सदर की ओर जा रहे थे।
ऐसे समय में बीच रास्ते में कुछ 'डिलिटेड' वोटर विरोध जता रहे थे। गाड़ियों पर 'Judge' (जज) लिखा देखते ही प्रदर्शनकारी भड़क उठे। आरोप है कि गाड़ियों से नीचे उतारकर काफी दूर पैदल चलाते हुए उन्हें बीडीओ ऑफिस में ले जाकर रोक कर रखा गया। रात को करीब 12 बजे के बाद केंद्रीय बल के जवानों के वहां पहुंचने के बाद वे घेरावमुक्त हो सकें।