कोलकाताः पश्चिम बंगाल की राजनीति में भवानीपुर एक बार फिर केंद्र में आ गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज गुरुवार को इस हाई-प्रोफाइल सीट पर भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी के नामांकन में शामिल होने पहुंचे। उनके साथ प्रस्तावित रोड शो को पार्टी अपने शक्ति प्रदर्शन के रूप में देख रही है।
अमित शाह देर रात कोलकाता पहुंचे और दोपहर करीब 12 बजे हाजरा क्रॉसिंग से रोड शो की शुरुआत होगी। यह रोड शो भवानीपुर के कई अहम इलाकों से गुजरते हुए सर्वे बिल्डिंग तक जाएगा। अंतिम चरण में शाह और अधिकारी पैदल चलकर नामांकन केंद्र तक पहुंचेंगे। इस आयोजन को भाजपा, ममता बनर्जी के गढ़ में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के प्रयास के तौर पर पेश कर रही है।
रणनीतिक दांव: भवानीपुर से सीधी टक्कर
भाजपा नेतृत्व के लिए यह केवल एक नामांकन नहीं, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनाव की रणनीतिक शुरुआत है। पार्टी पहले ही संकेत दे चुकी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आने वाले दिनों में यहां प्रचार करेंगे।
शुभेंदु अधिकारी , जिन्होंने 2021 में नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराया था, इस बार भवानीपुर से भी चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने उन्हें ममता के पारंपरिक क्षेत्र में उतारकर मुकाबले को सीधा और प्रतीकात्मक बना दिया है। यह फैसला पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की सहमति से लिया गया है, जिसे लंबे राजनीतिक निवेश के रूप में देखा जा रहा है।
भवानीपुर का इतिहास: ममता का मजबूत किला
भवानीपुर सीट लंबे समय से ममता बनर्जी का राजनीतिक आधार रही है। उन्होंने 2011 और 2016 में यहां से जीत दर्ज की। 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने यह सीट जीती थी।
बाद में हुए उपचुनाव में ममता बनर्जी ने यहां से वापसी की और करीब 58,832 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। उस चुनाव में भाजपा की प्रियंका टिबड़ेवाल उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी थीं। इस इतिहास को देखते हुए भवानीपुर को तृणमूल का गढ़ माना जाता है।
2026 चुनाव: हाई-वोल्टेज मुकाबले की आहट
2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में-23 और 29 अप्रैल को प्रस्तावित हैं, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। भवानीपुर में मतदान अप्रैल के अंतिम सप्ताह में होने की संभावना है। भाजपा अब तक 144 उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है।
शुभेंदु अधिकारी को भाजपा का संभावित मुख्यमंत्री चेहरा माना जा रहा है। उन्होंने दावा किया है कि पार्टी भवानीपुर में 25,000 से अधिक वोटों से जीत दर्ज करेगी। इस सीट को नंदीग्राम की तरह एक प्रतीकात्मक और प्रतिष्ठित मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है।
आगे की राजनीति: ‘परिवर्तन’ बनाम ‘परंपरा’
भाजपा जहां भवानीपुर के जरिए राज्य में ‘परिवर्तन’ का संदेश देना चाहती है, वहीं तृणमूल कांग्रेस अपने मजबूत संगठन और पारंपरिक वोट बैंक पर भरोसा कर रही है। अमित शाह की सक्रियता और नरेंद्र मोदी के संभावित दौरे से यह सीट पूरे राज्य की राजनीति का केंद्र बनती जा रही है।
स्पष्ट है कि भवानीपुर अब सिर्फ एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि 2026 के चुनावी नैरेटिव की धुरी बन चुका है।