पवनपुत्र हनुमान की पूजा हर जगह रामभक्त और वानर अवतार में ही होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं दुनिया में एक मंदिर ऐसा भी है जहां हनुमान जी की पूजा वानर नहीं बल्कि एक गिलहरी के रूप में होती है। हनुमान जयंती (2 अप्रैल) के खास अवसर पर हम आपको इस विशेष मंदिर के बारे में बताने वाले हैं जहां गिलहराज के तौर पर पूजे जाते हैं रामभक्त पवनपुत्र हनुमान!
कहां है यह मंदिर?
हनुमान जी का यह मंदिर उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में स्थित है जहां एक वानर नहीं बल्कि गिलहरी के रूप में उनकी पूजा होती है। संभवतः यह देश ही नहीं दुनिया का इकलौता मंदिर है जहां हनुमान जी अपने इस अनोखे स्वरूप में पूजे जाते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं इस मंदिर में हनुमान जी की प्रतीमा की एक और विशेषता है।
आमतौर पर जहां भी हनुमान जी की मूर्ति की पूजा होती है वहां उनके पूरे शरीर पर सिन्दुर लगाया रहता है। इस वजह से उनकी आंखें भी ढंक जाती है लेकिन अलीगढ़ के गिलहराज मंदिर में हनुमान जी की जो प्रतिमा है, उसकी आंखें बिल्कुल स्पष्ट दिखाई देती है। ऐसा लगता है जैसे हनुमान जी अपने प्रत्येक भक्त को देख और आर्शिवाद दे रहे हैं।
क्यों होती है इस मंदिर में गिलहरी के रूप में पूजा?
स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक हनुमान जी की एक गिलहरी के रूप में सबसे पहले पूजा सिद्ध संत श्री महेंद्रनाथ योगी जी महाराज ने की थी। कहा जाता है कि सपने में हनुमान जी ने उन्हें जब दर्शन दिए तब उन्होंने एक गिलहरी के रूप में उनकी पूजा की थी।
हर दिन हनुमान जी को चढ़ाया जाता है 40 चोला Facebook
दावा किया जाता है कि इस मंदिर में श्रीकृष्ण के बड़े भाई यानी दाऊ बलराम ने हनुमान जी की पूजा एक गिलहरी के रूप में की थी और इसका सबसे पहले संत श्री महेंद्रनाथ योगी जी को ही पता चला था। मान्यता है कि अगर कोई भक्त लगातार 41 दिनों तक इस मंदिर में हनुमान जी की पूजा करता है तो उसे सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाएगी।
मंदिर की स्थापना
स्थानीय मान्यताओं में कहा जाता है कि नाथ संप्रदाय के महंत को हनुमान जी ने सपने में दर्शन देकर कहा था कि मैं अचल ताल पर निवास करता हूं। इसके बाद जब उनके शिष्यों ने उस स्थान पर जाकर देखा तो वहां मिट्टी में ढेर सारी गिलहरियां खेलती मिली। गिलहरियों को हटाकर मिट्टी की खुदाई करने पर वहां से हनुमान जी की मूर्ति निकली जिसे इस मंदिर में स्थापित किया गया।
आमतौर पर किसी भी मंदिर में भगवान का श्रृंगार दिन में एक या अधिकतम 2 बार होता है। लेकिन गिलहराज मंदिर में हनुमान जी का श्रृंगार हर 25 मिनट में होता है जिसके बाद आरती भी की जाती है। किसी भी मंदिर में भगवान को दिन में 1 चोला चढ़ाया जाता है लेकिन गिलहराज मंदिर में एक दिन में हनुमान जी को 30 से 40 चोला चढ़ाया जाता है। मंदिर में सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन हनुमान जयंति के मौके पर यहां आने वाले भक्तों की संख्या में दोगुनी हो जाती है।